नई दिल्ली: देश की विभिन्न अदालतों में लंबित मुकदमों की बढ़ती संख्या को लेकर राज्यसभा सांसद दिलीप कुमार राय द्वारा पूछे गए सवाल का केंद्र सरकार ने लिखित उत्तर दिया है। सांसद ने सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ अदालतों में 1 वर्ष से लेकर 30 वर्ष से अधिक समय से लंबित पड़े मामलों का ब्योरा मांगा था।
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 16 जुलाई 2026 तक देशभर की अदालतों में कुल 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें से अकेले सुप्रीम कोर्ट में 96,024 मामले, विभिन्न उच्च न्यायालयों में 64.72 लाख और जिला व अधीनस्थ अदालतों में सर्वाधिक 4.98 करोड़ मामले विचाराधीन हैं।
ओडिशा से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, ओडिशा उच्च न्यायालय में 1,69,320 मामले और राज्य की निचली अदालतों में 18,68,323 मामले लंबित हैं।
दिलीप कुमार राय, राज्यसभा सांसद के मुताबिक, अदालती मामलों का त्वरित निपटारा जनता का न्याय प्रणाली पर विश्वास बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। सरकार और न्यायपालिका के एकीकृत प्रयासों से लंबित मामलों का बोझ जरूर कम होगा।
सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मामलों का फैसला पूरी तरह से न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, फिर भी मुकदमों का बोझ घटाने के लिए ई-कोर्ट फेज-3 परियोजना, फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें (FTSC), एरियर्स कमेटी का गठन और लोक अदालतों के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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