चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से लोकसभा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी एक बार फिर कानूनी घेरे में आते दिख रहे हैं। गोवा में पंजाब सरकार की एक बेशकीमती संपत्ति को लीज पर देने में कथित अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले की औपचारिक जांच शुरू करने के लिए राज्य सरकार से फिर से अनुमति मांगी है। यह मामला चन्नी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान (सितंबर 2021 से मार्च 2022) का है। आरोप है कि गोवा में पंजाब पर्यटन विभाग की लगभग 8 एकड़ तटीय जमीन को एक निजी होटल मालिक को बाजार दर से बेहद कम कीमत (लगभग 1 लाख रुपये प्रति महीना) पर लीज पर दे दिया गया था।
विजिलेंस अधिकारियों का दावा है कि करोड़ों रुपये मूल्य की इस जमीन के लीज सौदे में बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। आरोप यह भी है कि तीन पर्यटन संस्थाओं की मिल्कियत वाली इस संपत्ति को दो निजी कंपनियों की सहमति लिए बिना ही लीज पर दे दिया गया था। विजिलेंस ब्यूरो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत कार्रवाई कर रहा है।
इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी लोक सेवक के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की जांच शुरू करने से पहले सरकार से पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य है। इसी कड़ी में विजिलेंस ने अब फिर से अनुमति के लिए फाइल संसदीय मामलों के विभाग को भेजी है।

पहले भी उठ चुका है मामला
यह विवाद नया नहीं है। 28 जून 2023 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में इस मामले को उठाते हुए कहा था कि यह जमीन कौड़ियों के भाव लीज पर दी गई थी। इसके बाद उक्त लीज को रद्द कर दिया गया था और जांच के आदेश दिए गए थे। अक्टूबर 2023 में भी विजिलेंस ने जांच की अनुमति मांगी थी, लेकिन तब फाइल आगे नहीं बढ़ पाई थी।
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