चंडीगढ़ में सामने आए एक हालिया अध्ययन के अनुसार बच्चों में कैंसर का इलाज परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक परीक्षा बन गया है। एम्स के डॉक्टरों की रिसर्च में सामने आया है कि 26.6 प्रतिशत माता-पिता को नौकरी छोड़नी पड़ी और बड़ी संख्या में लोग जमीन व गहने बेचने को मजबूर हैं।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देश में स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कैंसर से जूझ रहे बच्चों के इलाज का बोझ अब केवल बीमारी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह हजारों परिवारों के लिए आर्थिक और सामाजिक संकट का कारण बन रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज के दौरान हर चौथे माता-पिता को अपनी नौकरी गंवानी पड़ रही है, जबकि हजारों परिवार इलाज का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने, जमीन बेचने और गहने गिरवी रखने को मजबूर हैं।
एम्स स्थित इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 1,048 कैंसर पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों पर अध्ययन किया। अध्ययन के मुताबिक 26.6 प्रतिशत माता-पिता को इलाज के दौरान नौकरी छोड़नी या गंवानी पड़ी। बड़ी वजह यह रही कि अधिकांश परिवारों को इलाज के लिए अपने शहर या गांव से दूर जाना पड़ा, जिससे नियमित रोजगार जारी रखना संभव नहीं रहा।
रिपोर्ट के अनुसार 77.1 प्रतिशत अभिभावकों को इलाज के लिए बार-बार दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ी, क्योंकि उनके आसपास बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। अध्ययन में शामिल 66.4 प्रतिशत बच्चे शहरी और 33.6 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से थे, जबकि 55.7 प्रतिशत बच्चों को इलाज के लिए 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ी।
इलाज का आर्थिक बोझ भी बेहद भारी पाया गया। अध्ययन में शामिल 50.9 प्रतिशत बच्चों के इलाज पर औसतन तीन लाख रुपये तक खर्च हुए। 47.4 प्रतिशत परिवारों की पूरी जमा-पूंजी इलाज में खत्म हो गई, जबकि 25 प्रतिशत से अधिक माता-पिता को कर्ज लेना पड़ा। 26.8 प्रतिशत परिवारों ने इलाज के लिए अपनी चल-अचल संपत्ति बेची, जिनमें 12 प्रतिशत ने जमीन और 9.4 प्रतिशत ने आभूषण तक बेच दिए।
कैंसर का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी गंभीर रूप से पड़ा। इलाज के कारण 18 प्रतिशत बच्चों को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी, जबकि लंबे इलाज और अस्पतालों के चक्कर लगाने के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई। कई बच्चे इलाज पूरा होने के बाद भी स्कूल नहीं लौट सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टियर-2 और टियर-3 शहरों में आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधाएं विकसित की जाएं तो परिवारों को दूसरे शहरों में भटकने और भारी आर्थिक नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों के दावों की वास्तविक स्थिति सरकार स्पष्ट करे। उनका कहना है कि आज भी किसी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार में गंभीर बीमारी आने का मतलब आर्थिक तबाही है। उन्होंने मांग की कि सरकार टियर-2 शहरों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रभावी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराए, ताकि इलाज के लिए परिवारों को अपनी रोजी-रोटी और संपत्ति दांव पर न लगानी पड़े।

