हरियाणा में सोशल मीडिया पर चर्चित 'कॉकरोच जनता पार्टी' को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराने के दावे के बाद नेतृत्व और श्रेय की नई सियासी जंग शुरू हो गई है। एडवोकेट सुधीर जाखड़ द्वारा चुनाव आयोग में आवेदन करने से इस डिजिटल आंदोलन में नया मोड़ आ गया है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा बटोर रही तथाकथित “कॉकरोच जनता पार्टी” अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। हरियाणा के एडवोकेट Sudhir Jakhar ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग में “कॉकरोच जनता पार्टी” के राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जनभावनाओं को देखते हुए उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर जाकर आवेदन किया है और जल्द ही जमीनी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—जब पार्टी का फाउंडर कोई और बताया जा रहा है, तो रजिस्ट्रेशन की पहल किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा क्यों की जा रही है?

यही सवाल अब सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। क्या यह “कॉकरोच जनता पार्टी” के भीतर नेतृत्व और श्रेय (क्रेडिट) की लड़ाई की शुरुआत है? कई लोग इसे सोशल मीडिया से निकले आंदोलन को राजनीतिक पहचान देने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे लोकप्रिय ट्रेंड का फायदा उठाने की कवायद भी बता रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं कई लोग “बहती गंगा में हाथ धोने” की कोशिश तो नहीं कर रहे, ताकि वायरल हो रहे इस नाम से राजनीतिक या सामाजिक पहचान बनाई जा सके।

हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट संगठनात्मक ढांचा या आधिकारिक नेतृत्व सामने नहीं आया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पहल एक मजबूत संगठन का रूप ले पाएगी या फिर अन्य सोशल मीडिया ट्रेंड्स की तरह केवल पोस्ट, वीडियो और बहस तक सीमित रह जाएगी। राजनीति में किसी भी नए संगठन के लिए जमीनी कैडर, स्पष्ट नेतृत्व और साझा एजेंडा सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं, और फिलहाल “कॉकरोच जनता पार्टी” को इन्हीं कसौटियों पर खुद को साबित करना होगा।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि क्या यह सोशल मीडिया की सनसनी जमीन पर उतरकर एक वास्तविक राजनीतिक प्रयोग बनेगी, या फिर नेतृत्व और श्रेय की खींचतान के बीच शुरुआत से पहले ही बिखर जाएगी।