TMC को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद पार्टी के अंदर की कलह अब खुलकर सबके सामन आ गयी है. राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच TMC ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मतलब कहना यह है कि पश्चिम बंगाल का सियासी ड्रामा अब कलकत्ता हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. अर्थात नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति विवाद की सुनवाई अब कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी.
TMC पार्टी ने स्पीकर के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले की सुनवाई 11 जून को होने की संभावना है. स्पीकर द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं.
TMC पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बोस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई है. टीएमसी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर 11 जून को सुनवाई होगी. पार्टी ने कोर्ट से विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के फैसले की न्यायिक समीक्षा करने और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुट द्वारा नामित वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की है.
जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल बेंच में 11 जून को सुनवाई होने की संभावना है. विवाद की शुरुआत तब हुई जब TMC के 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन कर दिया. पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी महज दो दिन बाद उन्होंने 58 विधायकों के समर्थन के साथ नेता प्रतिपक्ष पद पर दावा पेश कर दिया.
TMC ने औपचारिक रूप से घोषणा की थी कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय नेता प्रतिपक्ष होंगे, ऋतब्रत बनर्जी के दावे से कुछ घंटे पहले. ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति का पार्टी नेतृत्व ने विरोध किया है, जिसके बाद अब इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है.
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