शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है। पहले बारिश ने अमूमन हर जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुली तो पद वृद्धि को लेकर आंदोलन भी जारी हैं। हालात का अंदाजा भी इस बात से लगाया जा सकता है कि आठ साल पहले हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि 5 साल के अंदर शिक्षकों की कमी को पूरा किया जाना चाहिए। लेकिन यह आदेश भी मंत्रालय की धूल खाती फाइलों में दफन हो गया।
प्रदेश में आज भी 1.15 लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं और 70 हजार अतिथि शिक्षक ही स्कूलों को संभाल रहे हैं। राजधानी के नीलम पार्क में पिछले कई दिन से वर्ग-1 2023 के वेटिंग अभ्यर्थी पदवृद्धि की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उधर, अतिथि शिक्षक संघ ने भी 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। 5 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षक राजधानी में जुटेंगे। उनकी मांग है कि 12 महीने का सेवाकाल और स्थायी नीति लागू की जाए। यदि सरकार ने अब भी आंखें मूंदे रखी तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलेगा।
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इस मामले को लेकर राजनीति भी गर्म हो रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता और नेता जेपी धनोपिया ने कहा कि मध्य प्रदेश की नाव पार नहीं होने वाली। लंबे समय से मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। जिसे कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया। स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, सरकार सीएम राइस स्कूल, सांदीपनि विद्यालय जैसे सपनों को दिखा रही है। हकीकत का खुलासा आंदोलन कर रहे शिक्षकों के कई वर्ग संवर्ग के आंदोलन से ही रहा है।
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वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने कहा कि कांग्रेस के समय शिक्षा व्यवस्था का आईना पूरे प्रदेश ने देखा है। मध्य प्रदेश सरकार शिक्षकों की भर्ती भी कर रही है और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ भी कर रही है।
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