रवि रायकवार, दतिया। मध्यप्रदेश सरकार भले ही प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही हो और दतिया कलेक्टर स्वपनिल वानखडे लगातार बैठकों और निरीक्षण के जरिए व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दे रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले के स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ की अनदेखी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बने स्वास्थ्य केंद्रों के हालात बदतर हो चुके हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला दतिया के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कुम्हर्रा से सामने आया है, जहां डॉक्टर को इलाज छोड़कर खुद अस्पताल में झाड़ू-पोछा लगाना पड़ रहा है।

डॉक्टर ही बनीं सफाई कर्मी, अकेले संभाल रहीं अस्पताल

कुम्हर्रा स्थित इस अस्पताल में सफाई कर्मचारी कभी ड्यूटी पर नहीं आते, जिसके कारण यहां पदस्थ CHO डॉ. पूजा पटेल खुद पूरे अस्पताल की सफाई करती नजर आती हैं। डॉक्टर पूजा पटेल ने बताया कि सरकार और जिला प्रशासन के सख्त निर्देश हैं कि अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनी रहनी चाहिए। सफाई कर्मचारी के न आने के कारण अस्पताल को साफ-सुथरा रखने के लिए उन्हें खुद ही झाड़ू-पोछा उठाना पड़ता है। इसके अलावा अस्पताल में ANM भी समय पर नहीं पहुंचतीं, जिससे अकेले डॉक्टर पर ही पूरे स्वास्थ्य केंद्र का जिम्मा आ गया है।

सालों से नहीं है बिजली, डिस्चार्ज बीपी मशीन के सहारे इलाज

अस्पताल की स्थिति इतनी खराब है कि यहां सालों से बिजली की कोई सुविधा ही नहीं है। कुम्हर्रा के आसपास के लगभग आठ गांवों से मरीज, खासकर प्रसूति महिलाएं, यहां इलाज के लिए आती हैं। लेकिन बिजली न होने से डॉक्टरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मरीजों का बीपी मापने के लिए चार्जिंग वाली मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, जो अक्सर बीच में ही डिस्चार्ज हो जाती है।

वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी

डॉ. पूजा पटेल का कहना है कि उन्होंने अस्पताल में बिजली की व्यवस्था के लिए कई बार अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सीएमएचओ कभी ग्रामीण क्षेत्रों के आरोग्य मंदिरों का निरीक्षण करने नहीं पहुंचते, जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप्प पड़ी हैं और कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं।

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