दिल्ली के भविष्य के विकास की दिशा तय करने वाले मास्टर प्लान 2047 को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की बुधवार को हुई बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल गई है। लंबे समय से व्यापारी, किसान, डेवलपर्स और अन्य हितधारक इस नए मास्टर प्लान को लागू करने और अधिसूचित करने की मांग कर रहे थे। नए मास्टर प्लान में राजधानी के सुनियोजित विकास, आवासीय विस्तार, परिवहन नेटवर्क और शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा देने की तैयारी की गई है।
DDA की मंजूरी के बाद अब मास्टर प्लान 2047 को केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मंत्रालय द्वारा इसकी समीक्षा के बाद जल्द अधिसूचना जारी किए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्लीवासियों को नए मास्टर प्लान की सौगात दे सकती है। ऐसे में 15 अगस्त से पूर्व इसके अधिसूचित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
105 गांवों में होगा बड़े स्तर पर विकास
सूत्रों के अनुसार, लैंड पूलिंग नीति के तहत दिल्ली के 105 गांवों को विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। अब इस नीति को टाउन प्लानिंग मॉडल में परिवर्तित किया जाएगा। इसके तहत पी-2, के-1, के-2, एल, एन और जे जोन में नियोजित विकास किया जाएगा। इन सभी जोन को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जहां आवासीय और अन्य शहरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
कंसोर्टियम की अनिवार्यता खत्म होगी
अब तक लैंड पूलिंग नीति के तहत भूमि विकास के लिए डीडीए की निगरानी में एक कंसोर्टियम (संघ) बनाना अनिवार्य था। इसके तहत जमीन मालिकों को निर्धारित क्षेत्र में फ्लैट निर्माण और विकास कार्यों के लिए समूह बनाकर काम करना पड़ता था। इस व्यवस्था में डीडीए की 40 % और भूमि मालिकों की 60 % हिस्सेदारी निर्धारित थी। हालांकि, नए मास्टर प्लान में इस अनिवार्यता को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है, जिससे विकास प्रक्रिया को अधिक सरल और तेज बनाया जा सके।
अगले 10 वर्षों में बनेंगे 20 लाख नए फ्लैट
टाउन प्लानिंग मॉडल लागू होने के बाद DDA अगले 10 वर्षों में इन जोन में लगभग 20 लाख अतिरिक्त नए फ्लैटों के निर्माण का लक्ष्य लेकर चल रहा है। माना जा रहा है कि इससे दिल्ली में आवास की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और लाखों लोगों को आधुनिक आवास उपलब्ध हो सकेंगे।
UER-2 के किनारे बनेंगी हाईराइज इमारतें
मास्टर प्लान 2047 का एक प्रमुख प्रस्ताव अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (यूईआर-2) के आसपास हाईराइज इमारतों के निर्माण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत यूईआर-2 के दोनों ओर 280 मीटर के दायरे में ऊंची आवासीय और व्यावसायिक इमारतें विकसित की जाएंगी। दिल्ली में अब तक बड़े पैमाने पर हाईराइज विकास सीमित क्षेत्रों में ही देखने को मिला है। कनॉट प्लेस क्षेत्र में कई ऊंची व्यावसायिक इमारतें मौजूद हैं, जबकि कुछ निजी बिल्डरों ने भी राजधानी में बड़ी टाउनशिप विकसित की हैं। इसके अलावा डीडीए ने कड़कड़डूमा टावरिंग हाइट्स आवास योजना के तहत बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं विकसित की हैं। नए मास्टर प्लान के लागू होने के बाद यूईआर-2 कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर हाईराइज विकास होने की संभावना है, जिससे दिल्ली का शहरी परिदृश्य आधुनिक महानगरों की तर्ज पर विकसित हो सकता है।
TOD नीति का होगा विस्तार
नए मास्टर प्लान में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है। इस नीति के तहत मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडोर के आसपास स्थित भूमि का योजनाबद्ध विकास किया जाएगा, ताकि लोगों को सार्वजनिक परिवहन के नजदीक आवास और व्यावसायिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। डीडीए ने जुलाई 2026 में इन कॉरिडोर के आसपास स्थित अपनी भूमि और लैंड पार्सलों के विकास के लिए डेवलपर्स से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिल रही है। वर्तमान में डीडीए ने TOD नीति के तहत लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया है, जिसमें करीब 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पहली बार इस दायरे में लाया गया है। नए मास्टर प्लान के लागू होने के बाद इस नीति का और विस्तार किया जाएगा, जिससे सार्वजनिक परिवहन आधारित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
14 लैंड पार्सलों के आसपास होगा तेजी से विकास
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि मास्टर प्लान 2047 को मंजूरी मिलने के बाद TOD परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू होगा। इस नीति के तहत मेट्रो और आरआरटीएस स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में आवासीय, व्यावसायिक और कार्यालय परिसरों का एकीकृत विकास किया जाएगा, ताकि लोगों को रहने, काम करने और यात्रा करने की बेहतर सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें। इसके लिए कड़कड़डूमा, पीरागढ़ी, द्वारका और रोहिणी समेत दिल्ली के प्रमुख मेट्रो कॉरिडोर के आसपास 14 लैंड पार्सलों की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर शहरी विकास देखने को मिल सकता है।
जल्द हो सकती है अधिसूचना
DDA बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद मास्टर प्लान 2047 को अब केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मंत्रालय द्वारा इसकी अधिसूचना जल्द जारी किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्लीवासियों को इस बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान की सौगात मिल सकती है।
यमुना O-जोन और डूब क्षेत्र का होगा कायाकल्प
मास्टर प्लान 2047 में यमुना ओ-जोन और यमुना के डूब क्षेत्र के विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। योजना के तहत यमुना तट के आसपास के क्षेत्रों का पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। इन क्षेत्रों में हरित पट्टियों, जैव विविधता संरक्षण, सार्वजनिक खुले स्थानों और पर्यावरण अनुकूल विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यमुना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखते हुए उसे राजधानी के प्रमुख पर्यावरणीय और सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना है। इस परियोजना को लागू करने के लिए सरकारी संस्थानों, नीति-निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शहरी योजनाकारों, लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स, तकनीकी संस्थानों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा और परामर्श की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
शहरी विकास मानदंडों में लचीलापन
नए मास्टर प्लान की एक महत्वपूर्ण विशेषता शहरी विकास नियंत्रण मानदंडों को अधिक लचीला बनाना है। उपयोग परिसरों, गतिविधियों, पार्किंग व्यवस्था, भूमि उपयोग और मिश्रित विकास से जुड़े नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहर का विकास किया जा सके। योजना में मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज) को बढ़ावा देने के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं और शहरी सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मास्टर प्लान 2047 में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को प्रमुख आधार बनाया गया है। इसके तहत मनोरंजन और सार्वजनिक उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली ग्रीन-ब्लू परिसंपत्तियों के संरक्षण और विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी।योजना में जैव विविधता पार्कों का विकास, एकीकृत बाढ़ मैदान योजना, बावलियों और जल निकायों का पुनरुद्धार, नालों के किनारे बफर जोन का निर्माण तथा पैदल और साइकिल पथ विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही, नए भवनों को ग्रीन-ब्लू फैक्टर (GBF) मानकों का पालन करना होगा, जिससे जल संरक्षण, हरित आवरण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को बढ़ावा मिल सके।
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