कुमार इंदर, जबलपुर/ बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट में 31 बच्चों की मौत के विरोध में आदिवासी समाज के लोग 5 सितंबर को पीजी कॉलेज के सामने धरना प्रदर्शन किया। आदिवासी समाज ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर डाली। यही नहीं आदिवासी समाज ने स्वास्थ्य विभाग, पीएचई विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी सस्पेंड करने की मांग की। आंदोलन में बालाघाट जिले के अलावा प्रदेश के अन्य आदिवासी अंचलों से भी समाज के प्रतिनिधि पहुंचे हैं।

आंदोलन कर रहे समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि मृतक परिवारों को दिया जा रहा 2 लाख रुपए का मुआवजा अपर्याप्त है। उनकी मांग है कि सरकार प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देना चाहिए। बता दें कि, कई तरह की बीमारी के चलते बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा में अब तक करीब 31 बच्चों की मौत हो चुकी है।

पिछले शनिवार को खुद सीएम पहुंचे थे

बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पिछले शनिवार को खुद बालाघाट जाकर मोर्चा संभाला था। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया था कि आदिवासी अंचल इलाकों में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों के बेहतर इलाज, मृतकों को मुआवजा, मूलभूत सुविधा और अंदरूनी इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सभी जरूरी दिशा निर्देश दिए थे।

सीएमएचओ पर गिर चुकी है गाज

मामला बढ़ने पर बालाघाट सीएमएचओ को भी सस्पेंड कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की सीधे तौर पर लापरवाही सामने आने पर सीएमएचओ परेश उपलव को हटाने की कार्रवाई की गई थी।

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