Delhi Medicine Scam: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरणों और दवाओं की खरीद को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस मामले में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह (Pankaj KumarSingh) ने स्वास्थ्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद लंबित खरीद प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए तय समय सीमा के साथ विस्तृत कार्ययोजना विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई। मंत्री ने इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव से जवाब मांगा है कि निर्देशों के पालन में देरी क्यों हुई। इसके अलावा नोटिस में मेडिकल उपकरणों और दवाओं की खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने सचिव से ORS और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में लगे आरोपों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

ORS और मेडिकल उपकरणों की खरीद पर उठे सवाल

सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए हुई खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर मंत्री ने ओआरएस सहित कई अन्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले में आरोप लगाया गया है कि ओआरएस (ORS) की खरीद करीब 15 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से की गई, जबकि इसकी कीमत को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चादर, एक्स-रे मशीन समेत कई अन्य मेडिकल उपकरणों और दवाओं को कथित तौर पर अधिक कीमत पर खरीदने के आरोप भी सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर खरीद प्रक्रिया, कीमतों और संबंधित तथ्यों की जानकारी मांगी है। साथ ही उन्होंने ओआरएस और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में लगे आरोपों पर विभाग से स्पष्टीकरण देने को कहा है।

समय पर जानकारी नहीं देने का आरोप

नोटिस के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्री ने सबसे पहले 26 मई को स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर सभी लंबित खरीद प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही अस्पतालों की ओर से मांग भेजने की समय सीमा की भी समीक्षा करने को कहा गया था। मंत्री के निर्देश के बावजूद जब विभाग की ओर से अपेक्षित जानकारी नहीं मिली तो 17 जून को दूसरा पत्र जारी किया गया। इसमें विभाग से 19 जून तक कार्ययोजना और स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया था।

इसके बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री ने 22 जुलाई को तीसरा पत्र जारी किया। इसमें लंबित खरीद मामलों की स्थिति और उन्हें पूरा करने की समय सीमा से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। आरोप है कि इसके बावजूद दवाओं, मेडिकल सामग्री और उपकरणों की खरीद पूरी करने के लिए आइटम-वाइज विवरण, खरीद की स्थिति और निर्धारित समय सीमा उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी को लेकर मंत्री ने स्वास्थ्य सचिव से जवाब तलब किया है।

निर्देशों की अनदेखी पर स्वास्थ्य सचिव से जवाब तलब

नोटिस में कहा गया है कि विभागीय निर्देशों की अनदेखी के कारण जरूरी खरीद प्रक्रियाओं की निगरानी प्रभावित हुई। इसका असर जन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। मंत्री ने पूछा है कि कई बार निर्देश दिए जाने के बाद भी अब तक कार्रवाई रिपोर्ट या विस्तृत जवाब क्यों नहीं दिया गया। स्वास्थ्य सचिव से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि लंबित खरीद प्रक्रियाओं की स्थिति, कार्ययोजना और समयसीमा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में देरी क्यों हुई। नोटिस में विभागीय स्तर पर हुई कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मंत्री ने स्वास्थ्य सचिव से यह बताने को कहा है कि इस कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश क्यों न की जाए।

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