दिल्ली. समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की सरकार की पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवाद पारदर्शी तरीके से होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी छात्र नेताओं को बुलाया गया, लेकिन उनकी बातों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया.

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’20 जुलाई को छात्रों के 4 घंटे बर्बाद किए गए’

संसद से निकलते वक्त इकरा हसन ने कहा कि 20 जुलाई को आंदोलन के मुख्य नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया था. उनके मुताबिक छात्र नेताओं ने अपना मांगपत्र भी सौंपा, लेकिन सरकार की ओर से न कोई आश्वासन मिला और न ही किसी मांग पर स्पष्ट जवाब दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों का समय व्यर्थ किया गया.

‘बंद कमरे में नहीं, खुले मंच पर हो फैसला’

सपा सांसद ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में बातचीत खुले मंच पर होनी चाहिए, जहां सभी प्रदर्शनकारी मौजूद हों. उन्होंने कहा कि दो-चार लोगों को कमरे में बुलाकर बातचीत करना उचित तरीका नहीं है और आंदोलन से जुड़े फैसले सभी के सामने होने चाहिए.

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छात्रों की मांगों का समर्थन किया

इकरा हसन ने कहा कि वह आंदोलन में शामिल छात्रों की इस मांग से सहमत हैं कि सरकार के साथ होने वाली किसी भी बातचीत और निर्णय की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों में विश्वास बनाए रखने के लिए खुला संवाद जरूरी है.