सीजेपी के प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फर्जी और भ्रामक सूचनाओं को लेकर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस का कहना है कि आंदोलन से जुड़े कई भ्रामक पोस्ट, वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनकी निगरानी की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को 15 से अधिक फेक न्यूज (Fake News) और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट का खंडन किया। इसके साथ ही पुलिस की साइबर और खुफिया टीमें सैकड़ों वायरल वीडियो और ऑडियो के स्रोतों का पता लगाने में जुटी हैं, ताकि अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा सके। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि फर्जी सामग्री तैयार करने, भ्रामक जानकारी साझा करने या अफवाह फैलाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ये सोशल मीडिया पोस्ट निकले फर्जी
दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावे जांच में फर्जी या भ्रामक पाए गए। पुलिस ने बताया कि कई पोस्ट में पुराने वीडियो और तस्वीरों को मौजूदा घटनाओं से जोड़कर साझा किया गया, जबकि कुछ वीडियो को गलत संदर्भ में प्रसारित किया गया। इसके अलावा कई ऐसे दावे भी सामने आए, जो जांच में पूरी तरह झूठे पाए गए।
इन दावों को बताया गया फर्जी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावे जांच में भ्रामक या पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं। पुलिस ने जिन प्रमुख दावों का खंडन किया है, उनमें 12 वर्षीय बच्ची और एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ पुलिस द्वारा मारपीट, सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी, लाठीचार्ज के दौरान भगदड़ में एक लड़की की मौत तथा पुलिस द्वारा पेलेट गन या कील लगे डंडों के इस्तेमाल जैसे दावे शामिल हैं।
भ्रामक तरीके से प्रसारित किए गए वीडियो
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर महिलाओं पर हमले और कथित पुलिस हिंसा से जुड़े कई वायरल वीडियो प्रदर्शन स्थल के नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, इन वीडियो को पुराने या असंबंधित घटनाक्रम से जोड़कर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक वायरल ऑडियो क्लिप की भी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि इसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आवाज के साथ कथित छेड़छाड़ की गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ऑडियो क्लिप किसने तैयार की और उसे सोशल मीडिया पर किस उद्देश्य से प्रसारित किया गया।
पाकिस्तान आधारित हैंडलर्स की भूमिका का भी शक
दिल्ली पुलिस का दावा है कि वायरल ऑडियो क्लिप में मूल शांति बनाए रखने की अपील के साथ छेड़छाड़ कर उसे एडिट किया गया और फिर सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जांच में पाकिस्तान आधारित हैंडलर्स की संभावित भूमिका की भी आशंका जताई गई है। पुलिस का कहना है कि संबंधित ऑडियो क्लिप पूरी तरह फर्जी है और इसका पहले ही आधिकारिक रूप से खंडन किया जा चुका है।
फेक कंटेंट की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने बनाई विशेष फैक्ट-चेक टीम
सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष फैक्ट-चेक टीम का गठन किया है। यह टीम सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर वीडियो, फोटो और ऑडियो की डिजिटल फुटप्रिंट, डेटाबेस और अन्य तकनीकी माध्यमों से जांच कर रही है, ताकि उसकी सत्यता का पता लगाया जा सके और अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों पर हमले, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े वायरल वीडियो का भी CCTV फुटेज, AI कैमरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
AI कैमरों से होगी पहचान
दिल्ली पुलिस झड़पों में शामिल लोगों की पहचान के लिए AI आधारित कैमरों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, पथराव करने और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पहचान होने के बाद संबंधित आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस डेटाबेस के माध्यम से उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि (क्रिमिनल हिस्ट्री) भी खंगाली जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले भी किसी आपराधिक मामले में शामिल रहे हैं या नहीं।
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