Delhi High Risk Prisoners Interstate Transfer: रेखा गुप्ता सरकार (Rekha Gupta Government) दिल्ली की जेलों में गैंग नेटवर्क पर ब्रेक लगाने में जुट गई है। इसके लिए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने जेलों में बंद हाई-रिस्क कैदियों को दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर करने की योजना बना रही है। बकायदा इसके लिए ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब एमेंडमेंट) एक्ट-2025 (Transfer of Prisoners (Punjab Amendment) Act, 2025) को लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके पास होने से जेलों की सुरक्षा बढ़ेगी। साथ ही गैंगवार को रोकने और जेल के भीतर से संचालित आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने में सफलता मिलेगी।
दिल्ली सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से जेलों की सुरक्षा मजबूत होगी, गैंगवार पर अंकुश लगेगा और जेल के भीतर से संचालित होने वाले संगठित अपराध के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी। इससे राजधानी की जेलों में बंद विचाराधीन गैंगस्टरों, संगठित अपराधियों और हाई-रिस्क कैदियों को जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस पहल का मकसद जेल सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए हाई-रिस्क कैदियों के इंटरस्टेट ट्रांसफर को मुमकिन बनाना है। साथ ही, संगठित अपराध से निपटने के लिए कई राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करना भी इसका असल मकसद है।
क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत
दरअसल दिल्ली की जेलों में बड़ी संख्या में ऐसे कुख्यात अपराधी बंद हैं, जो अभी दोषी साबित नहीं हुए हैं और उनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। मौजूदा कानूनी व्यवस्था में दोषी कैदियों को एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में भेजने का प्रावधान है, लेकिन विचाराधीन कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण को लेकर प्रभावी व्यवस्था नहीं है। सरकार के मुताबिक इसी कानूनी कमी का फायदा उठाकर कुछ हाई-रिस्क विचाराधीन कैदी जेल के अंदर रहते हुए भी अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय रखते हैं। मई 2026 में दिल्ली में 26 चिन्हित गिरोहों के 188 सदस्यों की पहचान की गई थी, जिनमें से 107 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया गया था।
कैसे होगा दूसरे राज्य में ट्रांसफर
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी विचाराधीन गैंगस्टर या हाई-रिस्क कैदी को दूसरे राज्य की जेल में भेजने का फैसला संबंधित राज्यों की आपसी सहमति या गृह मंत्रालय की स्वीकृति के आधार पर किया जा सकेगा। यानी हर विचाराधीन कैदी को मनमाने तरीके से दूसरे राज्य में नहीं भेजा जाएगा। हाई-रिस्क कैदियों की स्थिति, सुरक्षा संबंधी जरूरत, कानून-व्यवस्था और जनहित जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा।
मौजूदा कानून में क्या दिक्कत है
फिलहाल ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1950 के तहत कैदियों के ट्रांसफर की व्यवस्था मुख्य रूप से दोषी साबित हो चुके कैदियों के लिए है। वहीं विचाराधीन कैदी संबंधित ट्रायल कोर्ट के रिमांड वारंट के आधार पर जेल में रहते हैं। उनके ट्रांसफर से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था राज्य की सीमाओं के भीतर ट्रांसफर तक सीमित है। यही वजह है कि अगर दिल्ली की जेल में बंद कोई कुख्यात विचाराधीन गैंगस्टर जेल सुरक्षा या कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, तो उसे दूसरे राज्य की जेल में भेजने के लिए स्पष्ट कानूनी तंत्र की कमी महसूस होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए पंजाब सरकार ने ‘ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब एमेडमेंट) एक्ट, 2025’ में संशोधन किया था. इस संशोधन को 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।
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