दिल्ली सरकार राजधानी में सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने सचिवालय में हाल ही में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ लोगों के बिजली बिल को कम करना नहीं है, बल्कि दिल्ली के हर घर को बिजली का उपभोक्ता होने के साथ-साथ उत्पादक बनाना भी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, दिल्ली में फिलहाल करीब 10,700 रूफटॉप सोलर सिस्टम (Rooftop solar systems) लगाए जा चुके हैं। इन सोलर सिस्टम से लगभग 228 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। सरकार अब इस क्षमता को बढ़ाकर 500 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

मार्च 2027 तक 2.30 लाख घरों में मुफ्त सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य

सरकार की योजना के तहत मार्च 2027 तक 2.30 लाख घरों की छतों पर मुफ्त सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए दिल्ली में रूफटॉप सोलर की क्षमता को तेजी से बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि इस पहल से घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली के बिल में बचत होगी। वहीं, घरों की छतों से सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने से दिल्ली की पारंपरिक बिजली पर निर्भरता भी कम होगी।

सब्सिडी का लाभ भी जारी रहेगा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि मौजूदा बिजली सब्सिडी जारी रहेगी। यानी पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा और इसके साथ रूफटॉप सोलर सिस्टम से बिजली की खपत में होने वाली बचत का अतिरिक्त फायदा भी मिलेगा। सरकार की सोलर नीति में 10 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का फोकस इस पूरी व्यवस्था को सरल बनाने और अधिक से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर है।

केंद्र और दिल्ली सरकार, दोनों से मिल सकता है सब्सिडी का लाभ

दिल्ली सोलर पोर्टल के मुताबिक, मौजूदा नीति के तहत आवासीय उपभोक्ताओं के लिए राज्य सरकार की ओर से सोलर कैपिटल सब्सिडी और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को केंद्रीय सब्सिडी का लाभ भी मिल सकता है।  योजना के तहत 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर केंद्रीय सब्सिडी अधिकतम 78 हजार रुपये तक है।

उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

दिल्ली सरकार के मुताबिक, रूफटॉप सोलर सिस्टम का फायदा केवल घर की बिजली की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं रहेगा। सोलर सिस्टम से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने की व्यवस्था के जरिए उपभोक्ता अपनी बिजली की लागत को और कम कर सकेंगे। दिल्ली की सोलर नीति में Generation Based Incentive (GBI) का भी प्रावधान किया गया है। मौजूदा नीति के अनुसार, 3 किलोवाट तक के आवासीय सोलर सिस्टम पर ₹3 प्रति यूनिट और 3 से 10 किलोवाट तक के सिस्टम पर ₹2 प्रति यूनिट का मासिक GBI दिया जाता है। इससे सोलर सिस्टम लगाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में बचत के साथ अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिल सकता है।

सरकार के सामने 500 मेगावाट तक पहुंचने की चुनौती

दिल्ली में 2.30 लाख घरों तक रूफटॉप सोलर योजना पहुंचाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। योजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र उपभोक्ताओं की पहचान से लेकर आवेदन प्रक्रिया, अधिकृत वेंडरों का चयन, सोलर सिस्टम की स्थापना और ग्रिड कनेक्शन का काम कितनी तेजी से पूरा होता है। इसके साथ ही सिस्टम की स्थापना के बाद 5 साल के रखरखाव की व्यवस्था को भी प्रभावी तरीके से लागू करना होगा।

सरकार के सामने मौजूदा 228 मेगावाट की रूफटॉप सोलर क्षमता को बढ़ाकर 500 मेगावाट तक पहुंचाने और बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य है। ऐसे में आने वाले महीनों में योजना के जमीनी क्रियान्वयन की रफ्तार सबसे महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, दिल्ली की सोलर पॉलिसी का उद्देश्य केवल लोगों के बिजली बिल को कम करना नहीं, बल्कि घरों को बिजली का उपभोक्ता होने के साथ-साथ बिजली पैदा करने वाला केंद्र बनाना है। सरकार का जोर इसी सोच के तहत दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाने पर है।

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