अयोध्या. श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्तुतीकरण (Representation) पेश किया गया है कथित गबन के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में जांच का निर्देश देने की मांग की गई है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को संबोधित यह प्रस्तुतीकरण एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) अनूप प्रकाश अवस्थी ने दिया है.

प्रस्तुतिकरण में कहा गया है कि भगवान श्री रामचंद्रजी मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाते हैं, जो न्याय, जवाबदेही और नैतिक शासन के प्रतीक हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि उनके जन्मस्थान पर चढ़ाए गए चढ़ावे से जुड़ा कोई भी आरोप किसी आम आपराधिक केस से कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है. प्रस्तुतीकरण में कहा गया, “जिन मामलों में संस्थाओं पर लोगों का भरोसा दांव पर लगा हो, वहां लाखों भक्तों का भरोसा सिर्फ एक ऐसी जांच से ही वापस लाया जा सकता है जो साफ तौर पर स्वतंत्र, व्यापक और जिसमें असर, दबाव या हितों के टकराव की कोई संभावना न हो.”

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प्रस्तुतीकरण में ये भी कहा गया कि राज्य सरकार ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है, लेकिन औपचारिक आपराधिक जांच और FIR न होने से मामले में सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठे हैं. रिप्रेजेंटेशन में कहा गया, “मैं किसी भी व्यक्ति, संस्था या अथॉरिटी के बारे में पहले से कोई राय नहीं बनाना चाहता. न ही मेरा ट्रस्ट पर कोई शक करने का इरादा है, जिसके सदस्यों ने बहुत कीमती सेवा दी है. हालांकि, आरोपों की गंभीरता और इसमें शामिल संस्था की बहुत बड़ी अहमियत के लिए आम मापदंड से ज्यादा पारदर्शिता और भरोसे की जरूरत है.”