कटक। ओडिशा के कटक जिले के महांगा ब्लॉक में विकास कार्यों को लेकर विवाद गहरा गया है। जनहित के लिए स्वीकृत परियोजनाओं को कथित तौर पर अयोग्य बताकर रोके जाने का गंभीर आरोप लगा है। महांगा ब्लॉक के 8 इंजीनियरों की रिपोर्ट अब सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि कटक सदर ब्लॉक की विशेष जांच टीम की पुनर्जांच में बड़ा अंतर सामने आया है।

‘विकसित गांव, विकसित ओडिशा’ योजना के तहत बुनियादी ढांचा मौजूद होने के बावजूद बराहीपुर, श्रीकृष्णपुर, चाहापड़ा, गोकन, उषुमा और ललितगिरि जैसी पंचायतों की कई विकास परियोजनाओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया था। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर फर्जी और भ्रामक रिपोर्ट सौंपी।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में महांगा ब्लॉक की 37 पंचायतों में 129 विकास परियोजनाओं के लिए 5 करोड़ 39 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। हालांकि, जिम्मेदार इंजीनियरों द्वारा योग्य परियोजनाओं को अयोग्य दर्शाए जाने पर स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कटक जिलाधिकारी से शिकायत की।

पुनर्जांच में सामने आई बड़ी सच्चाई

जिलाधिकारी के निर्देश पर कटक सदर ब्लॉक के 3 सदस्यीय इंजीनियरों की टीम ने मौके पर जाकर पुनर्जांच की। जांच में सामने आया कि महांगा के इंजीनियरों द्वारा अयोग्य घोषित की गई 45 परियोजनाओं में से 37 परियोजनाएं पूरी तरह से योग्य हैं।

एक ही विभाग के दो अलग-अलग इंजीनियरों की रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर आने के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ब्लॉक अध्यक्ष ने सवाल उठाया है कि क्या इस फर्जी रिपोर्टिंग के पीछे कोई ‘अदृश्य दबाव’ या राजनीतिक मंशा काम कर रही है।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकीं निगाहें

फिलहाल इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। अब मुख्य सवाल यह है कि गलत रिपोर्ट देकर विकास कार्यों को बाधित करने वाले दोषी इंजीनियरों के खिलाफ जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा। साथ ही, रुकी हुई परियोजनाओं का काम जल्द शुरू होगा या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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