मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने अंडरवर्ल्ड और ड्रग्स तस्करी से जुड़े इकबाल मिर्ची और उसके परिवार के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है. ईडी की मुंबई जोनल ऑफिस ने इकबाल मिर्ची की करीब 700.27 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच कर दिया है. यह कार्रवाई भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून (FEOA), 2018 के तहत की गई है. हालांकि, इकबाल मिर्ची की साल 2013 में मृत्यु हो गई थी. इकबाल मिर्ची को दाऊद का करीबी माना जाता था और उसके काले कामों में उसका साथ दिया करता था.
इन संपत्तियों को अटैच किया गया
अटैच की गई संपत्तियों में मुंबई के वर्ली इलाके की तीन बेहद कीमती प्रॉपर्टी — राबिया मेंशन, मरियम लॉज और सी व्यू — शामिल हैं. इनकी कुल कीमत करीब 497 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इसके अलावा दुबई में मौजूद करीब 203.27 करोड़ रुपए की संपत्तियां भी ईडी ने अटैच की हैं.
ईडी की जांच मुंबई पुलिस में दर्ज कई पुराने मामलों के आधार पर शुरू हुई थी. इनमें एमआरए मार्ग, येलोगेट, भायखला पुलिस स्टेशन, एंटी नारकोटिक्स सेल और डीसीबी-सीआईडी द्वारा दर्ज केस शामिल हैं. इन मामलों में इकबाल मिर्ची पर IPC, आर्म्स एक्ट, टाडा और एनडीपीएस एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगे थे.
ड्रग्स तस्करी, उगाही जैसे अवैध कारोबार में शामिल था इक़बाल
जांच में सामने आया कि इकबाल मिर्ची ड्रग्स तस्करी, उगाही, अवैध हथियार कारोबार और संगठित अपराध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था. इन अपराधों से कमाई गई काली कमाई को भारत और विदेशों में संपत्तियां खरीदकर सफेद किया गया. कई संपत्तियां परिवार के सदस्यों, करीबी सहयोगियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थीं. ईडी के मुताबिक वर्ली की जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, वे मूल रूप से सर मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट की थीं.
जांच में पता चला कि साल 1986 में इन्हें M/s Rockside Enterprises के जरिए सिर्फ 6.50 लाख रुपए में खरीदा गया था. कागजों में संपत्तियां ट्रस्ट के नाम रहीं, लेकिन असली नियंत्रण इकबाल मिर्ची और उसके परिवार के पास था. ईडी ने यह भी दावा किया है कि ट्रस्ट ने इकबाल मिर्ची के साथ मिलकर अदालत के सामने गलत जानकारी दी और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए, ताकि पहले की अटैचमेंट कार्रवाई से इन संपत्तियों को छुड़ाया जा सके.
इकबाल मिर्ची के अवैध कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि अवैध पैसों का इस्तेमाल दुबई में होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और कॉर्पोरेट बे व DEC टावर्स में 14 रियल एस्टेट यूनिट खरीदने में किया गया. ये संपत्तियां आसिफ इकबाल मेमन और उसके परिवार के नाम पर बताई गई हैं. ईडी ने इस मामले में पीएमएलए कोर्ट, मुंबई में चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. मामले में Asif Iqbal Memon, Junaid Iqbal Memon और Hajra Iqbal Memon समेत कई लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं.
मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने 26 फरवरी 2021 को आसिफ, जुनैद और हाजरा इकबाल मेमन को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था. फिलहाल ईडी की आगे की जांच जारी है.
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