Technology Desk, नई दिल्ली/चेन्नई: भारत में आपातकालीन चिकित्सा सेवा (Emergency Healthcare System) एक नए और ऐतिहासिक दौर में प्रवेश करने जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि देश में भारी ट्रैफिक जाम और दूरदराज के इलाकों की वजह से गंभीर मरीजों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। लेकिन जल्द ही यह स्थिति बदलने वाली है।

आईआईटी मद्रास (IIT Madras) से जुड़े एयरोस्पेस स्टार्टअप ‘द ई-प्लेन कंपनी’ (The ePlane Company) और देश के प्रमुख निजी अस्पताल समूह अपोलो हॉस्पिटल्स (Apollo Hospitals) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस साझेदारी के तहत भारत में इलेक्ट्रिक एयर एम्बुलेंस (eVTOL) और मेडिकल डिलीवरी ड्रोन्स की सेवा शुरू की जाएगी।

ट्रैफिक का झंझट खत्म: 7 गुना तेजी से पहुंचेगा इलाज

​इस पहल की सबसे खास बात यह है कि मरीजों को अस्पतालों तक ले जाने की गति पहले से सात गुना ज्यादा तेज हो जाएगी। ई-प्लेन कंपनी द्वारा विकसित की जा रही e200X नाम की इलेक्ट्रिक एयर एम्बुलेंस मरीजों को भारी ट्रैफिक के बीच फंसे बिना सीधे ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाएगी।

पारंपरिक हेलीकॉप्टर सेवाओं की तुलना में यह इलेक्ट्रिक एयर एम्बुलेंस न केवल काफी सस्ती होगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और कम शोर करने वाली भी होगी।

​’गोल्डन आवर’ में बचेंगी हजारों जिंदगियां

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी दुर्घटना, हार्ट अटैक या स्ट्रोक के मामलों में पहला 1 घंटा बेहद संवेदनशील होता है, जिसे ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour) कहा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सड़क दुर्घटनाओं या आपात स्थिति में केवल 20 प्रतिशत मरीज ही समय पर अस्पताल पहुंच पाते हैं। इस नई हवाई तकनीक से मरीजों को सीधे दुर्घटना स्थल या छोटे केंद्रों से बड़े विशेषज्ञ अस्पतालों में बिना किसी देरी के शिफ्ट किया जा सकेगा, जिससे देश में हर साल हजारों बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

​मिनटों में होगा ऑर्गन और ब्लड ट्रांसप्लांट

​केवल मरीजों का परिवहन ही नहीं, बल्कि मेडिकल सप्लाई के लिए भी यह तकनीक मील का पत्थर साबित होगी। ई-प्लेन की सहयोगी शाखा ‘अंबर विंग्स’ (Amber Wings) के विशेष मेडिकल ड्रोन्स के जरिए:

​मानव अंग (Organs): ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी अंगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाए बिना मिनटों में भेजा जा सकेगा।

​इमरजेंसी सप्लाई: ब्लड बैग्स, जीवनरक्षक दवाएं, वैक्सीन और महत्वपूर्ण पैथोलॉजी सैंपल्स की डिलीवरी सेकंडों और मिनटों के हिसाब से मुमकिन होगी।

​तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर की मुख्य विशेषताएं

​इस सेवा के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान का मॉडल e200X है, जो एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) विमान है। यह विमान 160 किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और एक बार में 110 किमी तक की दूरी तय करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए किसी बड़े रनवे की आवश्यकता नहीं होती, यह महज 8×10 मीटर की छोटी छत या जगह पर भी आसानी से लैंड और टेक-ऑफ कर सकता है। क्षमता की बात करें तो यह 1 पायलट और 2 यात्रियों को ले जा सकता है या फिर 200 किलोग्राम तक का पेलोड (वजन) उठा सकता है। इसके अलावा, दवाओं और जरूरी सैंपल्स की डिलीवरी के लिए अंबर विंग्स द्वारा स्वचालित मेडिकल ड्रोन नेटवर्क का संचालन किया जाएगा।

भविष्य की तैयारी और नियामक मंजूरी

​अपोलो हॉस्पिटल्स और द ई-प्लेन कंपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसके तहत शहरों और प्रमुख अस्पतालों में ‘वर्टिपोर्ट्स’ (Vertiports) और इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।

आने वाले समय में यह तकनीक भारत के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह से बदलकर रख देगी और दुर्गम से दुर्गम इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए भी विश्वस्तरीय इमरजेंसी केयर पाना बेहद आसान हो जाएगा।]

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