राजधानी दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब एक नया और बड़ा कदम उठाने जा रही है। छतों पर सोलर पैनल लगाने के बाद अब झीलों और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि यह वही योजना है, जिसे पहले आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रस्तावित किया था, लेकिन वह लागू नहीं हो सकी थी। अब भारतीय जनता पार्टी सरकार इसे जमीन पर उतारने की तैयारी में है।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट से जुड़ी 5 अहम बातें:
1. बवाना झील से होगी शुरुआत
अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत पायलट आधार पर बवाना झील से की जाएगी। यहां झील की सतह पर सोलर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन किया जाएगा। सरकार इस योजना को मंजूरी दे चुकी है और जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे दिल्ली के अन्य जलाशयों में भी लागू किया जा सकता है।
2- दिल्ली में अपनी तरह का पहला फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट
दिल्ली में शुरू होने जा रहा यह फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट अपनी तरह का पहला प्रयास होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी में अब तक इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल नहीं हुआ है, इसलिए इसे एक पायलट मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के अन्य हिस्सों जैसे तेलंगाना और विशाखापत्तनम में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर दिल्ली में यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे आगे बढ़ाते हुए वजीराबाद जैसे अन्य जल स्रोतों, खासतौर पर यमुना नदी के हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
3- पायलट प्रोजेक्ट के लिए बवाना झील क्यों बनी पहली पसंद
दिल्ली सरकार ने फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के पायलट चरण के लिए बवाना झील को चुना है, जिसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। सबसे अहम वजह यह है कि इस इलाके में पहले से एक बड़ा पावर प्लांट मौजूद है। इससे यहां उत्पादित बिजली का इस्तेमाल सीधे उसी प्लांट की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकेगा, जिससे ऊर्जा वितरण की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। इसके अलावा, बवाना झील दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। इससे प्रोजेक्ट से जुड़ी अनुमति, मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जा सकेंगी, जो किसी भी नए प्रोजेक्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे आगे दिल्ली के अन्य जलाशयों और यमुना के हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
4- फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट 5–6 करोड़ की लागत से होगा तैयार
दिल्ली में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट को तकनीकी रूप से आधुनिक और चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए बवाना झील को चुना गया है। अधिकारियों के अनुसार, सबसे पहले झील की सतह पर फ्लोटर (तैरने वाले प्लेटफॉर्म) लगाए जाएंगे। इन फ्लोटर्स पर सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे, जो सूर्य की ऊर्जा को बिजली में बदलेंगे। इसके बाद इन पैनलों को ट्रांसफॉर्मर से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पन्न बिजली को ग्रिड में सप्लाई किया जा सके और उसका उपयोग किया जा सके। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 5 से 6 करोड़ रुपये आंकी गई है। यदि यह पायलट सफल रहता है, तो इसे बड़े स्तर पर लागू कर दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है।
5- 4500 मेगावाट का लक्ष्य, फ्लोटिंग सोलर बनेगा गेमचेंजर
दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट को एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पानी की सतह पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल, पारंपरिक रूफटॉप सोलर की तुलना में अधिक प्रभावी और किफायती साबित हो सकते हैं। इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे जमीन की बचत होती है और पानी की सतह का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई शहर इस मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं। दिल्ली सरकार ने अपनी नई सोलर पॉलिसी के तहत मार्च 2027 तक 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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