हेमंत शर्मा, इंदौर/ खामगांव। जिन बच्चों के सामने कभी संसाधनों की कमी उनके सपनों की सबसे बड़ी दीवार हुआ करती थी, अब उन्हीं बच्चों के हाथों में शिक्षा, खेल और कौशल विकास के नए अवसर पहुंच रहे हैं। वंचित और आदिवासी समाज के बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच खामगांव स्थित सूर्योदय पारधी समाज आदिवासी आश्रम विद्यालय में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया।

श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट द्वारा संचालित इस आश्रम विद्यालय में नवनिर्मित भव्य ऑडिटोरियम और तीन अत्याधुनिक खेल मैदानों से सुसज्जित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत के हाथों हुआ। यह कार्यक्रम महज किसी भवन के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा। इसे श्रद्धेय सद्गुरु भय्यूजी महाराज की उस सोच को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया गया, जिसमें शिक्षा, संस्कार और सेवा के जरिए समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने का सपना देखा गया था।

जहां सुविधाओं की कमी थी, वहां अब संभावनाओं का मैदान

सूर्योदय आश्रम विद्यालय में तैयार किया गया नया ऑडिटोरियम विद्यार्थियों के लिए केवल कार्यक्रम आयोजित करने की जगह नहीं होगा। यहां शैक्षणिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, व्यक्तित्व विकास और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध होगा। वहीं तीन अत्याधुनिक खेल मैदान बच्चों के लिए नई संभावनाओं का दरवाजा खोलेंगे। क्योंकि प्रतिभा किसी एक वर्ग या शहर की मोहताज नहीं होती… जरूरत होती है तो सिर्फ सही अवसर की। इन खेल सुविधाओं के जरिए बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने, उसे निखारने और आगे चलकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

भय्यूजी महाराज के सपने को जमीन पर उतारने की कोशिश

सद्गुरु भय्यूजी महाराज शिक्षा, संस्कार और सेवा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम मानते थे। उनका जोर इस बात पर रहा कि समाज के जरूरतमंद और वंचित बच्चों को सिर्फ शिक्षा न दी जाए, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण मिले जहां वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। सूर्योदय आश्रम विद्यालय में नई सुविधाओं का विस्तार इसी सोच की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। यहां मकसद सिर्फ बच्चों को किताबों तक सीमित रखना नहीं है। शिक्षा के साथ संस्कार, खेल के साथ अनुशासन और कौशल के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

लोकार्पण हुआ… लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी

किसी भी संस्था के लिए नई इमारत और नई सुविधाएं उपलब्ध होना महत्वपूर्ण उपलब्धि जरूर है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब इन सुविधाओं का लाभ बच्चों के जीवन में दिखाई दे।

कितने बच्चे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं?

कितने विद्यार्थी बेहतर शिक्षा हासिल कर उच्च संस्थानों तक पहुंचते हैं? कितने बच्चे कौशल सीखकर अपने पैरों पर खड़े होते हैं और कितने परिवारों की अगली पीढ़ी गरीबी और संसाधनों की कमी के चक्र से बाहर निकलती है? इन सवालों के जवाब आने वाले वर्षों में इस पूरे अभियान की वास्तविक सफलता तय करेंगे।

समारोह में जुटी बड़ी हस्तियां

लोकार्पण समारोह में महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके, कामगार मंत्री आकाश फुंडकर, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी, देवास सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी, भाजपा किसान मोर्चा मध्यप्रदेश के प्रदेश मंत्री राजीव पटेल, अमनोरा फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिरुद्ध देशपांडे सहित जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना दिया।

शिक्षा से आगे… सेवा का बड़ा दायरा

श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट और अमनोरा फाउंडेशन के सहयोग से चलाए जा रहे सामाजिक कार्यों का दायरा केवल शिक्षा और खेल तक सीमित नहीं बताया गया है। स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, निःशुल्क प्रशिक्षण, महिला स्वावलंबन, आश्रम, बालगृह, अन्न क्षेत्र और अन्य सामाजिक सेवा प्रकल्पों के माध्यम से जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यानी उद्देश्य सिर्फ एक विद्यालय को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा और सेवा के जरिए सामाजिक बदलाव की एक बड़ी श्रृंखला तैयार करना है।

पारधी और आदिवासी समाज के बच्चों के लिए नई उम्मीद

सूर्योदय पारधी समाज आदिवासी आश्रम विद्यालय का यह विस्तार उन बच्चों के लिए खास मायने रखता है, जिनके सामने शिक्षा और संसाधनों तक पहुंच हमेशा आसान नहीं रही। एक तरफ आधुनिक ऑडिटोरियम है…दूसरी तरफ अत्याधुनिक खेल मैदान और इनके बीच भविष्य के सपनों को पूरा करने की कोशिश करते बच्चे। संदेश साफ है- प्रतिभा को अवसर मिले तो परिस्थितियां उसकी राह नहीं रोक सकतीं।

शिक्षा से जागृति… खेल से आत्मविश्वास… कौशल से आत्मनिर्भरता

सूर्योदय आश्रम विद्यालय में हुआ यह लोकार्पण सिर्फ नए भवन और मैदानों का उद्घाटन नहीं, बल्कि उस विचार को आगे बढ़ाने की कोशिश है जिसमें वंचित समाज की नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, संस्कार, खेल और कौशल के जरिए मजबूत बनाने का लक्ष्य है। भय्यूजी महाराज की सेवा-दृष्टि को आगे बढ़ाने का यह प्रयास अब कितनी बड़ी सामाजिक ताकत बनता है, यह आने वाला समय तय करेगा। लेकिन फिलहाल खामगांव से एक संदेश जरूर निकल रहा- 

शिक्षा से जागृति, संस्कार से शक्ति, खेल से आत्मविश्वास और कौशल से आत्मनिर्भरता। यही वह रास्ता है, जो वंचित बच्चों के सपनों को सिर्फ सपना नहीं रहने देता, उन्हें हकीकत में बदलने की ताकत देता है।

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