Dharm Desk: प्राचीन परंपराओं में घर के मुख्य प्रवेश द्वार को सिर्फ एक रास्ता नहीं बल्कि ऊर्जा का मुख्य साधन माना गया है। घर के मुख्य द्वार से ही देव-कृपा सकारात्मक ऊर्जाएं और समृद्धि घर के भीतर प्रवेश करती हैं। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही मुख्य द्वार की स्वच्छता, लबपवित्रता और वहां किए जाने वाले शुभ कार्यों पर विशेष बल दिया जाता रहा है।
यदि घर के मुख्य द्वार पर वास्तु के अनुकूल और शुद्ध माहौल निर्मित किया जाए तो परिवार के सदस्यों का भाग्य चमकने लगता है और जीवन की सभी समस्याएं समाप्त होने लगती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर सप्ताह के दो विशेष दिन मंगलवार और शनिवार को एक अत्यंत अचूक और सरल उपाय करने की सलाह दी जाती है, जिससे घर में व्याप्त दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है।
उपाय की सामग्री और विधि
1.सबसे पहले शाम के समय एक मिट्टी का छोटा दीपक या पात्र लें और उसमें थोड़े से साबुत, स्वच्छ व बिना टूटे हुए चावल रखें।
2.चावल के ऊपर शुद्ध कपूर की एक या दो टिक्की रखें और उसे प्रज्वलित कर दें।
3.इस जलते हुए दीपक को घर के मुख्य द्वार की चौखट के पास रखें और मन ही मन घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
4.इस प्रयोग को हर मंगलवार और शनिवार की शाम को निष्ठापूर्वक करना चाहिए।
5.मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष ऊर्जा का प्रतीक है। कपूर की सुगंध और ज्वाला हवा में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को भस्म कर देती है।
6.चावल को अखंड धन-धान्य और पूर्णता का प्रतीक माना गया है।जो घर में आर्थिक स्थिरता लाता है।
मुख्य द्वार पर कपूर और चावल का यह संयोजन जलाने से सोई हुई किस्मत जागती है। व्यापार तथा नौकरी में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं। जिन घरों में अक्सर तनाव रहता है वहां यह प्रयोग रक्षा-कवच की तरह कार्य करता है और परिवार में सुख-समृद्धि का विस्तार करता है।
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