सुप्रीम कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े विवाद और अदालत में जजों व वकीलों की मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक एवं सोशल मीडिया इस्तेमाल की जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान कही गई बातों को संदर्भ से काटकर मीम्स, वायरल वीडियो और राजनीतिक कंटेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के व्यावसायिक इस्तेमाल का आरोप
याचिकाकर्ता वकील राजा चौधरी ने 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला दिया है। इस दौरान तत्कालीन मौखिक टिप्पणी में ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। याचिका के मुताबिक, इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इसे अलग-अलग संदर्भों में पेश किया गया और कथित तौर पर राजनीतिक प्रतीक, मीम तथा वायरल कंटेंट के रूप में इस्तेमाल किया गया।
PIL में अदालत की मौखिक टिप्पणियों के नाम, पहचान या संदर्भ का गलत इस्तेमाल करने और सोशल मीडिया के जरिए उनसे आर्थिक लाभ कमाने की गतिविधियों की जांच की मांग की गई है।
फर्जी वकीलों और लॉ डिग्री की जांच की भी मांग
याचिका में बड़ी संख्या में कथित फर्जी वकीलों और फर्जी कानून की डिग्रियों से जुड़े मामलों की सीबीआई जांच कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कंटेंट की भूमिका की जांच की आवश्यकता जताई है।
केंद्र, MeitY, BCI और CBI को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। यह विवाद मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद सोशल मीडिया पर उभरे एक व्यंग्यात्मक और युवा-केंद्रित डिजिटल आंदोलन से जुड़ा बताया जा रहा है। याचिका में आरोप है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को मीम्स, ट्रोलिंग और वायरल कंटेंट के जरिए सनसनीखेज बनाकर उनका व्यावसायिक फायदा उठाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट इस PIL पर अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को करेगा।
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