पंजाब में बढ़ती गर्मी में के कारण डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और पेट संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत जनवरी से अप्रैल 2026 तक 3,279 मरीजों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया गया। बड़ी संख्या लोगों ने इस योजना का लाभ उठा कर अपना इलाज करवाया है.
गैस्ट्रो और पेट संबंधी बीमारियों पर ₹73.42 लाख खर्च
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल गैस्ट्रो और डिहाइड्रेशन से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर ही ₹73.42 लाख खर्च किए गए हैं। सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, पेट संक्रमण, उल्टी और कमजोरी से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अप्रैल महीने में ही 1,400 से अधिक मरीजों ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और डिहाइड्रेशन संबंधी समस्याओं का इलाज करवाया।
इनमें सबसे ज्यादा मामले मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस के रहे, जिनकी संख्या 1,050 से अधिक दर्ज की गई। वहीं लगभग 115 मरीज गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित पाए गए।
बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर ने बताया कि अत्यधिक गर्मी और दूषित खानपान के कारण पेट संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गर्म मौसम में भोजन जल्दी खराब हो जाता है और दूषित पानी बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। मरीज अक्सर दस्त, उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और बुखार जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉ. धीर के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा सबसे अधिक रहता है। बच्चों में उल्टी और दस्त के कारण शरीर में तरल पदार्थ तेजी से कम हो जाता है, जबकि बुजुर्गों में रिकवरी धीमी होती है।
होशियारपुर सबसे अधिक प्रभावित
आंकड़ों के मुताबिक Hoshiarpur जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 250 से अधिक बुजुर्ग मरीजों का इलाज किया गया।
इसके अलावा Jalandhar, Patiala, Ludhiana, Rupnagar, Barnala, Sangrur और Bathinda में भी गैस्ट्रो और डिहाइड्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं Sri Muktsar Sahib, Pathankot, Fatehgarh Sahib और Gurdaspur में उल्टी और गंभीर डिहाइड्रेशन के कई मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए।
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र नागरिकों को बिना किसी खर्च के जांच, दवाइयां, आईवी फ्लूड, हाइड्रेशन थेरेपी और अस्पताल में भर्ती जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सेहत कार्ड की वजह से लोग इलाज में देरी करने के बजाय समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे गंभीर जटिलताओं का खतरा कम हुआ है।
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