शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सरकारी दावों और करोड़ों रुपये के बजट के सदुपयोग पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। अभी मानसून ने पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है लेकिन पहली ही बारिश में गांधी मेडिकल कॉलेज का हाल बेहाल हो गया है। कॉलेज के C-ब्लॉक बॉयज हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर पानी भर जाने से वहां रहने वाले मेडिकल छात्रों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, खुली भ्रष्टाचार की पोल!

हॉस्टल के अंदर पानी घुसने और जलभराव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि भावी डॉक्टर किस तरह घुटने तक भरे पानी और अव्यवस्था के बीच रहने को मजबूर है। इस वीडियो के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के काम करने के तरीके और पहली ही बारिश में चरमराए सिस्टम को लेकर तीखे सवाल उठने लगे हैं।

3.50 करोड़ का नवीनीकरण सिर्फ कागजों पर?

पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा सवाल यह है कि हॉस्टल का हाल ही में करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपए की भारी-भरकम लागत से नवीनीकरण किया गया था। अगर साढ़ें तीन करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी पहली ही सामान्य बारिश में हॉस्टल टापू बन जाता है तो इस बजट का उपयोग कहां और कैसे किया गया? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के बिना ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया?

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खराब ड्रेनेज व्यवस्था: कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी?

पहली बारिश ने हॉस्टल के ड्रेनेज सिस्टम की भी पोल खोलकर रख दी है। करोड़ों रुपये लगाने के बाद भी पानी की निकासी के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या इसके लिए जिम्मेदार ड्रेनेज इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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