दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह (Pankaj Simgh) ने कथित दवा, सर्जिकल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की खरीद से जुड़े मामले की जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जवाब पर असंतोष जताया है। मंत्री ने स्वास्थ्य सचिव के माध्यम से भेजे गए जवाब को अपर्याप्त बताते हुए विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट दोबारा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 12 अगस्त 2026 को जारी अपने पत्र में डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी आरोपों और जांच से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट करने में विफल रही है। उन्होंने इस जवाब को पूरी तरह असंतोषजनक बताते हुए रिकॉर्ड के आधार पर बिंदुवार और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

मंत्री ने स्पष्ट किया है कि केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि मामला जांच एजेंसियों के पास विचाराधीन है। विभाग को अपने आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर सभी जरूरी तथ्य उपलब्ध कराने होंगे। 12 अगस्त 2026 को जारी पत्र में डॉ. पंकज सिंह ने स्वास्थ्य सचिव के माध्यम से भेजे गए जवाब को पूरी तरह असंतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से दिए गए जवाब में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, जबकि संबंधित तथ्य विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं।

 ‘सवालों का जवाब नहीं दिया गया’

डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि विभाग से जिन जानकारियों की मांग की गई थी, उनमें खरीद की दरें, GST, लैंडेड कॉस्ट (कुल लागत), खरीदी गई मात्रा और अन्य वित्तीय एवं प्रशासनिक विवरण शामिल थे। लेकिन उपलब्ध कराए गए जवाब में इन मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। मंत्री ने विशेष रूप से ORS पाउच, बेड शीट और पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज और विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इनमें उत्पादों की स्पेसिफिकेशन, सप्लाई ऑर्डर, डिलीवरी रिकॉर्ड, खरीद की तुलनात्मक जानकारी और अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी सूचनाएं सरकारी खरीद और वित्तीय रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

भुगतान रिकॉर्ड में मौजूद होते हैं सभी दस्तावेज

अपने पत्र में मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सामान्य वित्तीय नियम (GFR) के तहत किसी भी भुगतान बिल को वित्तीय जांच-पड़ताल के बाद ही प्रोसेस किया जाता है। इसके साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज संलग्न होते हैं, जिनमें सप्लाई ऑर्डर, इनवॉइस, GST विवरण, निरीक्षण एवं स्वीकृति रिपोर्ट, डिलीवरी चालान, मात्रा सत्यापन प्रमाणपत्र और तुलनात्मक विवरण शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही मूल खरीद फाइलें किसी जांच एजेंसी के पास हों, लेकिन भुगतान और लेखा रिकॉर्ड में मौजूद ये दस्तावेज विभाग के पास उपलब्ध रहते हैं। इसलिए इन जानकारियों को उपलब्ध कराने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

 ‘विभाग में सारी जानकारी है मौजूद’

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह और भी चिंताजनक है कि विभाग में उपलब्ध अन्य रिकॉर्ड से जानकारी एकत्र करने और उपलब्ध कराने का गंभीर प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सवालों पर इस प्रकार का लापरवाह और अधूरा जवाब स्वीकार नहीं किया जा सकता। डॉ. पंकज सिंह ने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (H&FW) के सचिव व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA), अकाउंट्स ब्रांच, पे एंड अकाउंट्स ऑफिस तथा अन्य संबंधित कार्यालयों में उपलब्ध सभी रिकॉर्ड की जांच की जाए। इसके आधार पर एक संपूर्ण, बिंदुवार और दस्तावेजों से समर्थित जवाब तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई विशेष जानकारी रिकॉर्ड जब्त होने या किसी जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए कानूनी प्रतिबंध के कारण उपलब्ध नहीं कराई जा सकती है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए और संबंधित दस्तावेजों के साथ कारण बताया जाए।

17 अगस्त तक दें नया और पूरा जवाब

स्वास्थ्य मंत्री ने अपने निर्देशों में कहा कि एक नया, संपूर्ण और बिंदुवार जवाब हर हाल में 17 अगस्त 2026 तक प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में ORS, हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीन और बेडशीट की खरीद में कथित 650 करोड़ रुपये की अनियमितताओं को लेकर जांच शुरू की गई थी और इसी मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई थी। गौरतलब है कि जांच की स्थिति को लेकर डॉ. पंकज सिंह ने स्वास्थ्य सचिव रूपेश कुमार ठाकुर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीद में हो रही देरी को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी किया गया था।

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