पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। सुशासन तिहार के दौरान आयोजित शिविर में पेड़ गिरने से घायल हुए ग्रामीणों को आर्थिक सहायता और मुआवजा नहीं मिलने पर गरियाबंद जिले का सरपंच संघ प्रशासन के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है। ब्लॉक सरपंच संघ ने आगामी सुशासन तिहार शिविरों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। इसके तहत 3 जून को आमदी में आयोजित होने वाले सुशासन तिहार कार्यक्रम में गरियाबंद ब्लॉक के सरपंच शामिल नहीं होंगे।
सरपंच संघ ने इस संबंध में पोस्टर जारी कर बहिष्कार की घोषणा की है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि हादसे में घायल हुए लोगों की सुध लेने के बजाय प्रशासन जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है।

खरहरी शिविर में हुआ था हादसा
दरअसल, 27 मई को गरियाबंद ब्लॉक के खरहरी में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान एक विशालकाय पेड़ अचानक गिर गया था। इस हादसे में दो बच्चों समेत सात ग्रामीण घायल हो गए थे। घायलों का उपचार फिलहाल उनके परिजन अपने खर्च पर करा रहे हैं।

घटना के बाद से पीड़ित परिवार लगातार प्रशासन से आर्थिक सहायता, बेहतर इलाज और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को खरहरी के सरपंच जगदीश ठाकुर, सरपंच संघ अध्यक्ष कोमल देव ध्रुव, अन्य पंचायत प्रतिनिधियों और पीड़ित परिवारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर भगवान सिंह उइके से मुलाकात की।
कलेक्टर से चर्चा भी रही बेनतीजा
सरपंच संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह दूसरी बार था जब पीड़ित परिवार और पंचायत प्रतिनिधि मदद की मांग लेकर प्रशासन के पास पहुंचे थे। हालांकि कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि इस तरह की सहायता के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी और बढ़ गई।

सरपंच संघ अध्यक्ष कोमल देव ध्रुव ने कहा कि आयोजन स्थल का चयन और पूरा कार्यक्रम प्रशासन की देखरेख में आयोजित किया गया था। ऐसे में हादसे में घायल लोगों की मदद की जिम्मेदारी भी प्रशासन की बनती है।
उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में प्रशासन का रवैया निराशाजनक है। इसी कारण ब्लॉक सरपंच संघ ने आगामी सुशासन तिहार शिविरों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। उन्होंने दावा किया कि जिला सरपंच संघ का भी उन्हें समर्थन मिल रहा है।
बेहतर इलाज और सहायता की मांग
क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि हादसे के बाद घायलों और उनके परिजनों को बेहतर इलाज का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी कई परिवार परेशान हैं और सहायता के लिए भटक रहे हैं।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि सभी घायलों का किसी अच्छे अस्पताल में गुणवत्तापूर्ण उपचार कराया जाए और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ितों को न्याय और उचित उपचार नहीं मिलेगा, तब तक लोगों की नाराजगी स्वाभाविक है।

जानिए प्रशासन का पक्ष
वहीं अपर कलेक्टर पंकज डाहिरे ने कहा कि हादसे में घायल लोगों का उपचार स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग की निर्धारित योजनाओं के अनुसार जो भी सहायता पात्र होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी।
हालांकि सरपंच संघ प्रशासन के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और उसने फिलहाल सुशासन तिहार के आगामी कार्यक्रमों के बहिष्कार का फैसला बरकरार रखा है।
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