गाजियाबाद. निजी फाइनेंस कंपनी से 7.60 करोड़ रुपये का लोन लेकर उसे चुकाने के लिए फर्जी हीरे और नकली दस्तावेज देने वाले आरोपी को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी ने कंपनी को भरोसा दिलाने के लिए हीरे की सप्लाई का फर्जी टैक्स इनवॉइस और रसीद तक तैयार कर दी थी, लेकिन जांच में पूरा मामला फर्जी निकला.
पुलिस के मुताबिक आरोपी दिल्ली के पीतमपुरा निवासी विमल जैन है. उसने एलिगेंस कैपिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से 7.60 करोड़ रुपये का लोन लिया था. लोन लेने के बाद आरोपी ने करीब छह महीने तक न तो किस्त जमा की और न ही ब्याज का भुगतान किया.
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नोटिस मिलने पर बोला- हीरे देकर चुका दिया कर्ज
कंपनी की ओर से जब आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया तो उसने दावा किया कि उसने लोन की रकम के बदले कंपनी को हीरे दे दिए हैं. आरोपी ने इसके सबूत के तौर पर टैक्स इनवॉइस और डायमंड डिलीवरी नोट भी पेश किया. हालांकि कंपनी ने जब दस्तावेजों की जांच कराई तो पूरा मामला संदिग्ध मिला. जांच में पता चला कि आरोपी ने फर्जी बिल और दस्तावेज तैयार कर कंपनी को गुमराह करने की कोशिश की थी.
पहले भी करोड़ों की टैक्स चोरी में आ चुका है नाम
एसीपी सूर्यबली मौर्य ने बताया कि आरोपी विमल जैन पहले भी आर्थिक अपराध के मामले में जांच एजेंसियों के निशाने पर रह चुका है. साल 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसे करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने भाई नरेश जैन के साथ मिलकर कई फर्जी कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों के जरिए फर्जी लेन-देन कर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का आरोप है. इस मामले में ईडी ने आरोपी की करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की थी.
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बैंक लोन चुकाने के लिए रची थी पूरी साजिश
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने पीतमपुरा स्थित एक संपत्ति के बदले बैंक से करीब 9 करोड़ रुपये का लोन लिया था. इस रकम को चुकाने के लिए उसने एलिगेंस कैपिटल सर्विसेज से 7.60 करोड़ रुपये का कर्ज लिया. जब कंपनी ने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने असली रकम लौटाने के बजाय फर्जी हीरे और दस्तावेजों का सहारा लिया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है. साथ ही फर्जी दस्तावेजों और अन्य लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है.


