चंडीगढ़। पटियाला निवासी महिला अधिकारी की सीनियर टाउन प्लानर (एसटीपी) पद पर पदोन्नति की मांग खारिज कर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी को पदोन्नति का न मौलिक और न निहित अधिकार है, बल्कि पदोन्नति के लिए विचार करने का अधिकार है। जस्टिस नमित कुमार ने निर्देश दिया कि जिस अवधि में उन्होंने एसटीपी पद का करंट ड्यूटी चार्ज संभाला, उस अवधि का वेतन और भत्ते उन्हें दिए जाएं।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का एसटीपी पद पर पदोन्नति का दावा अस्वीकार किया, पर उन्हें 21 जुलाई 2023 से लेकर सेवानिवृत्ति की तिथि तक करंट ड्यूटी चार्ज के दौरान उच्च पद का वेतन-भत्ते देने के लिए पात्र होंगी। याचिकाकर्ता ने 1990 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में बतौर जूनियर ड्राफ्ट्समैन सेवा शुरू की थीं।
2008 में उन्हें प्लानिंग ड्राफ्ट्समैन पद पर पदोन्नत किया गया। बाद में पंजाब लोक सेवा आयोग के जरिए उनका चयन असिस्टेंट टाउन प्लानर पद पर हुआ और फिर वह डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर पद पर पदोन्नत हुई। 2023 में बतौर डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर 5 साल सेवा की, जिससे वह एसटीपी पद की पात्र हो गईं।

विभाग ने जवाब दिया कि याचिकाकर्ता ने 41% अस्थायी दिव्यांग प्रमाण पत्र जमा कर दिव्यांग कर्मियों को मिलने वाले सेवा लाभ से 58 की बजाय 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु का लाभ लेने का दावा किया था। उन्होंने एक और प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें 53% स्थायी दिव्यांगता दर्शाई गई।
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