राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल पास हो गया है। प्रदेश में अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है। 30 दिन के अंदर लिव-इन की सूचना नहीं देने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती हैं। आइए जानते है एमपी में UCC कानून के तहत क्या है लिव इन की गाइडलाइन…
30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन
लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत होने के एक महीने के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार के पास डिक्लेरेशन देना अनिवार्य है। यह गाइडलाइन अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर सभी पर लागू होगी।
माता-पिता को सूचना
लिव-इन में रहने वाले पार्टनर में से किसी एक की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो रजिस्ट्रार इसकी सूचना माता-पिता या अभिभावकों को अनिवार्य रूप से देगा।
पुलिस को रिकॉर्ड
रजिस्ट्रेशन के बाद रजिस्ट्रार लिव-इन जोड़ों का रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भेजेगा।
रिश्ता खत्म करने का नियम
यदि कोई जोड़ा लिव-इन संबंध समाप्त करना चाहता है, तो उन्हें रजिस्ट्रार के सामने तलाक जैसी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन देना होगा।
सजा और जुर्माना
बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहने पर 3 महीने तक की जेल और 10 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान। नोटिस के बाद भी पालन न करने पर 6 महीने तक की जेल और 25 हजार तक का जुर्माना हो सकता है।
गलत जानकारी देने पर सजा
रजिस्ट्रेशन के दौरान गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है।
शादीशुदा होने पर लिव-इन
पहले से विवाहित व्यक्ति बिना कानूनी तलाक के किसी अन्य के साथ लिव-इन में नहीं रह सकेगा। यदि धोखे से लिव-इन में रहता है तो 5 साल तक की जेल का कड़ा प्रावधान है।
भरण-पोषण, गुजारा भत्ता
यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ता है तो महिला अदालत के जरिए कानूनी पत्नी की तरह गुजारा भत्ता का दावा कर सकती है। लिव-इन संबंध से पैदा होने वाले बच्चों को पूर्ण वैधानिक दर्जा मिलेगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा।
आयु सीमा
महिला के लिए न्यूनतम 18 वर्ष और पुरुष के लिए 21 वर्ष तय की गई है।
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