कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 14 साल के मासूम बच्चे की जान बचा ली। छतरपुर के रहने वाले शिवम के सिर और पैर में आरपार धंसा त्रिशूल करीब पांच घंटे की सर्जरी के बाद निकाला गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि डॉक्टरों ने बच्चे की आंख और दिमाग को सुरक्षित बचा लिया। सफल ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुका है। प्रदेश में इस तरह की यह पहली सफल सर्जरी बताई जा रही है।
दरअसल, छतरपुर जिले का रहने वाले 14 साल का शिवम बीती 25 जून को अपने घर की छत पर खेल रहा था। इसी दौरान उसका बैलेंस बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। चुकी नीचे मंदिर था, ऐसे में वह त्रिशूल पर जा गिरा। त्रिशूल का एक सिरा बाईं आंख के पास से सिर के अंदर चला गया, जबकि दूसरा सिरा उसके बाएं पैर में आर-पार धंस गया। परिजन बच्चे को पहले स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे गंभीर हालत में ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल रेफर किया गया।
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जयारोग्य अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉअविनाश शर्मा के नेतृत्व में न्यूरो सर्जरी, एनेस्थीसिया और ट्रॉमा विशेषज्ञों की टीम ने करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से त्रिशूल को दो अलग-अलग फेज में निकाला ताकि आंख, दिमाग और खून की नशो को कोई नुकसान न पहुंचे। ऑपरेशन के दौरान इंफेक्शन रोकने के भी विशेष इंतजाम किए गए।
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉक्टर अविनाश शर्मा ने बताया कि यह ऑपरेशन इसलिए बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण था क्योंकि त्रिशूल आंख और दिमाग के बेहद संवेदनशील हिस्से से होकर गुजरा था। थोड़ी सी भी चूक बच्चे की जान या उसकी आंख की रोशनी के लिए खतरा बन सकती थी। लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता और टीमवर्क से ऑपरेशन सफल रहा और अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गया है। बच्चे ने स्वस्थ्य होने के बाद कहा कि उसे नई जिंदगी डॉक्टर्स ने दी है, वह भी अब बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा।
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