कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर नगर निगम के संपत्तिकर रिकॉर्ड में ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने निगम की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक संपत्ति की असली प्रॉपर्टी आईडी बदलकर फर्जी आईडी तैयार की गई, रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदला गया और फर्जी संपत्तिकर रसीद के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री तक करा दी गई,मामले में नगर निगम के एक निलंबित और एक सेवानिवृत्त अधिकारी सहित चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

दरअसल मामला ग्वालियर नगर निगम के वार्ड नंबर 30 के टैगोर नगर की संपत्ति से जुड़ा है,शिकायतकर्ता सुरेश बनवानी के मुताबिक उनकी संपत्ति की मूल संपत्तिकर आईडी 1000255876 थी।आरोप है कि इसी संपत्ति के रिकॉर्ड में दूसरी आईडी 1000107294 तैयार की गई और उसके जरिए गलत दस्तावेजों के आधार पर दूसरे व्यक्ति का नाम संपत्ति रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया।

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नगर निगम की जांच में ई-नगरपालिका की लॉग रिपोर्ट से रिकॉर्ड में बदलाव की पूरी जानकारी सामने आई।लॉग के मुताबिक 20 मार्च 2025 को शाम 4 बजकर 17 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट के बी संपत्ति के रिकॉर्ड में मालिक का नाम विजय पुत्र राजाराम पाल से बदलकर जयनारायण पुत्र स्वर्गीय उदय सिंह किया गया।इसी दौरान कॉलोनी का नाम भी बदल दिया गया।इसके बाद 28 मार्च 2025 को संपत्ति के निर्मित क्षेत्रफल में भी बदलाव किए जाने की बात जांच में सामने आई।सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ जब जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड में बदलाव से जुड़ी लॉग रिपोर्ट में तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक और कर संग्राहक नरेंद्र कुशवाह की यूजर आईडी और तत्कालीन APTO महेंद्र शर्मा की ENP 1.0 यूजर आईडी का उपयोग होना मिला।नगर निगम ने नरेंद्र कुशवाह को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। निगम के मुताबिक उनका जवाब 31 जुलाई 2026 को मिला, लेकिन उसे संतोषजनक नहीं माना गया। नरेंद्र कुशवाह पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि महेंद्र शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

फर्जीवाड़े का दूसरा अहम हिस्सा सामने आया संपत्ति की बिक्री में,जांच के मुताबिक 15 मई 2025 को जयनारायण ने यह संपत्ति अशोक सिंह पुत्र नन्हे सिंह, निवासी यमुना नगर, ग्वालियर को बेच दी।जिस संपत्तिकर रसीद के आधार पर यह सौदा किया गया, जांच में वह रसीद नगर निगम कार्यालय से जारी होना ही नहीं पाई गई।यानी आरोप है कि फर्जी संपत्तिकर रसीद तैयार कर उसके आधार पर संपत्ति की बिक्री और रजिस्ट्री कराई गयी,मामले की जांच में नगर निगम ने मूल संपत्तिकर रसीद, कथित फर्जी रसीद, लेजर, रजिस्ट्री, टीसी, आरआई की रिपोर्ट और ई-नगरपालिका की प्रमाणित लॉग फाइल समेत दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं।नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक संपत्तिकर ने निगमायुक्त के निर्देश पर विश्वविद्यालय थाने में शिकायत की,इसके बाद पुलिस ने विक्रेता जयनारायण,खरीदार अशोक सिंह, तत्कालीन ARI नरेंद्र कुशवाहा और तत्कालीन APTO महेंद्र शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, पद के दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।अब पुलिस यह जांच कर रही है कि संपत्ति के रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर और किसकी मिलीभगत से किया गया, फर्जी रसीद कैसे तैयार हुई और इस पूरे फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या है।

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