हरियाणा सरकार ने बोर्ड, निगमों और आयोगों के गैर-सरकारी चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए एक समान सेवा शर्तें लागू करते हुए मानदेय व अन्य भत्तों में भारी बढ़ोतरी की है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पहली बार बोर्ड, निगम, आयोग और समितियों में नियुक्त गैर-सरकारी चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए एक समान सेवा शर्तें लागू कर दी हैं। नई पॉलिसी के तहत चेयरमैन को हर महीने 75 हजार रुपये तक मानदेय, मकान किराया भत्ता, सरकारी वाहन, ड्राइवर और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार के इस फैसले को गैर-सरकारी पदाधिकारियों के लिए बड़ी राहत और स्पष्ट व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।

नई व्यवस्था के अनुसार गैर-सरकारी चेयरमैन और चेयरपर्सन को अधिकतम 75 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें अधिकतम 50 हजार रुपये तक हाउस रेंट अलाउंस (HRA/मकान किराया भत्ता) या वास्तविक किराया, जो भी कम होगा, प्रदान किया जाएगा। वहीं वाइस चेयरमैन या डिप्टी चेयरमैन को 45 हजार रुपये तक मानदेय और 45 हजार रुपये तक मकान किराया भत्ता मिलेगा। नियमित जिम्मेदारी निभाने वाले सदस्यों को 30 हजार रुपये तक मानदेय तय किया गया है।

सरकार की नई सेवा शर्तों में गैर-सरकारी पदाधिकारियों को कई अन्य सुविधाएं भी दी गई हैं। चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को कार्यालय और आवास दोनों स्थानों पर टेलीफोन सुविधा, ग्रुप-ए अधिकारियों के बराबर मोबाइल सुविधा, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा। यात्रा और दैनिक भत्ते हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 के तहत ग्रेड-1 अधिकारियों के समान होंगे। साथ ही मेडिकल सुविधाएं भी ग्रुप-ए अधिकारियों की तर्ज पर दी जाएंगी।

नई पॉलिसी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई गैर-सरकारी पदाधिकारी विधायक भी है और पहले से सरकारी आवास में रह रहा है, तो उसे अलग से मकान किराया भत्ता नहीं मिलेगा। हालांकि सरकारी आवास के लिए दी जाने वाली लाइसेंस फीस की प्रतिपूर्ति की जाएगी। इसके अतिरिक्त चेयरमैन को अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी के समान स्टाफ कार और ड्राइवर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का कहना है कि इस फैसले से बोर्ड, निगम और समितियों में नियुक्त पदाधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर स्पष्टता आएगी और कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होगी। अब तक विभिन्न संस्थाओं में सुविधाओं और मानदेय को लेकर अलग-अलग व्यवस्था थी, जिसे एक समान ढांचे में लाने का प्रयास किया गया है।