पंचकूला में आयोजित बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव को सर्वसम्मति से हरियाणा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया है। यह नई कार्यकारिणी प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मंच प्रदान करने के लिए काम करेगी।
पंचकूला। हरियाणा में पैरा स्पोर्ट्स से जुड़े खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए एक नई शुरुआत हुई है। पंचकूला के रेड बिशप होटल में रविवार को पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ हरियाणा की नई गवर्निंग बॉडी का चुनाव निष्पक्षता के साथ पूरा किया गया। इस चुनावी प्रक्रिया में प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव को सर्वसम्मति से एसोसिएशन का नया अध्यक्ष चुना गया है। आरती सिंह राव इस जिम्मेदारी के जरिए अपने पिता और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के सपनों को आगे बढ़ाएंगी।
नई कार्यकारिणी का गठन
इस बैठक में सर्वसम्मति से पूरी कार्यकारिणी का चुनाव किया गया। इसमें अभिजीत सिंह को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पवन कुमार को महासचिव, एडवोकेट सचिन मलिक को सहसचिव तथा भीम सिंह को कोषाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्यों के रूप में ज्योति कुमार, सुरेंद्र कुमार, राहुल सिंह, विमल यादव और नरसी राम को शामिल किया गया है। चुनाव अधिकारी एडवोकेट विनय यादव की निगरानी में यह पूरी प्रक्रिया पूरी हुई, जबकि पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के सहसचिव देवाकर ने बतौर पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) इसमें हिस्सा लिया।
केंद्रीय मंत्री का आभार
आयोजन के दौरान केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के योगदान को याद करते हुए उनके प्रति आभार जताया गया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उनके प्रयासों की वजह से ही हरियाणा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन को अपना पहला कार्यालय भवन मिल सका है। इसके साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि जब राव इंद्रजीत सिंह पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष थे, तब समिति को नई दिल्ली में स्थायी दफ्तर मिला था और देश के पैरा खेलों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली थी।
खिलाड़ियों को मिलेंगे अवसर
एसोसिएशन की नवनिर्वाचित अध्यक्ष आरती सिंह राव ने अपनी प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई गवर्निंग बॉडी हरियाणा के पैरा खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखकर काम करेगी। उनका मुख्य उद्देश्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ज्यादा से ज्यादा अवसर उपलब्ध कराना है।

