चंडीगढ़। भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) हरियाणा के उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार का नया रास्ता खोल सकता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस समझौते से राज्य के टेक्सटाइल, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग सेक्टर को UK के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है। इसके साथ ही प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), स्टार्टअप, युवा और किसानों के लिए भी वैश्विक निवेश तथा तकनीकी साझेदारी के नए अवसर तैयार होंगे।

मुख्यमंत्री सोमवार को गुरुग्राम की एक यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘हरियाणा-यूके CETA ट्रेड ब्रिज : अनलॉकिंग ग्लोबल अपॉर्च्युनिटीज फॉर हरियाणा’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन ब्रिटिश हाई कमीशन के सहयोग से किया गया। इस दौरान विदेश समन्वय विभाग का लोगो भी लॉन्च किया गया। मुख्यमंत्री ने UK से आए प्रतिनिधियों, निवेशकों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों का हरियाणा में स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों का उल्लेख किया।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ हरियाणा का बड़ा आर्थिक लक्ष्य

नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक निवेश के लिए मजबूत गंतव्य के तौर पर अपनी स्थिति बना रहा है। इसी दिशा में हरियाणा ने 2047 तक देश की अर्थव्यवस्था में 1 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 1 नवंबर को हरियाणा अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे करेगा और इसी ऐतिहासिक पड़ाव के आसपास राज्य अगले साल ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027’ आयोजित करेगा।

उन्होंने बताया कि 2016 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में करीब 6.41 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। वहीं अगस्त में मुंबई से शुरू किए गए ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अंतरराष्ट्रीय आउटरीच अभियान के दौरान 17 कंपनियों के साथ 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापन (MoU) हुए। सरकार अब निवेश सम्मेलन के लिए देश के सात प्रमुख शहरों के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, दावोस, जर्मनी, UK, ब्राजील, चिली और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय कारोबारी केंद्रों में रोड शो करने की तैयारी कर रही है।

नए उद्योगों और रोजगार पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, एग्रीबिजनेस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों के लिए राज्य ने 10 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियां लागू की हैं। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करना और 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना है।

उन्होंने कहा कि इन नीतियों की शुरुआत के पहले ही दिन 1.10 लाख करोड़ रुपये के 110 MoU हुए, जिनमें करीब 24,350 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश शामिल है। वहीं MSME और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नई ‘हरियाणा प्रोग्रेसिव MSME एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026’ भी लागू की है।

निर्यात बढ़ाने पर जोर, UK से कारोबार विस्तार की उम्मीद

मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य में फरवरी 2019 में पहली MSME नीति लागू होने के बाद 15 लाख से ज्यादा MSME का औपचारिक पंजीकरण हुआ है। नई नीति के तहत 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश आकर्षित करने, 5 लाख से अधिक रोजगार पैदा करने और हरियाणा के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम समेत हरियाणा के औद्योगिक केंद्रों ने मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, कृषि और सेवा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में CETA राज्य की मौजूदा औद्योगिक क्षमता को UK के बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

‘कम टू हरियाणा, इन्वेस्ट इन हरियाणा, पार्टनर विद हरियाणा’

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा-UK ट्रेड ब्रिज केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य निवेश, तकनीकी सहयोग, रोजगार और वैश्विक बाजार तक स्थानीय कारोबारियों की पहुंच को मजबूत करना है। उन्होंने UK की कंपनियों और निवेशकों से हरियाणा में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा— ‘कम टू हरियाणा, इन्वेस्ट इन हरियाणा, पार्टनर विद हरियाणा।’

उन्होंने कहा कि प्रदेश के MSME और स्टार्टअप अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं। वहीं UK की कंपनियां हरियाणा की प्रतिभा और औद्योगिक क्षमता के साथ मिलकर नए समाधान विकसित कर सकती हैं।

ब्रिटिश उप उच्चायुक्त (चंडीगढ़) अल्बा स्मेरिग्लियो ने कहा कि हरियाणा और UK के बीच पहले से व्यापार, निवेश, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में संबंध हैं। CETA इन संबंधों को और विस्तार देने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने हरियाणा के मानेसर, फरीदाबाद, गुरुग्राम और पानीपत जैसे औद्योगिक केंद्रों को UK के लिए सहयोग की संभावनाओं वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।

दो महीने में निर्यात और निवेश को गति देने का दावा

विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के एडवाइजर पवन चौधरी ने कहा कि 15 जुलाई को CETA लागू होने के बाद हरियाणा में इसके जरिए वास्तविक कारोबार, निर्यात ऑर्डर और निवेश को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था करीब 154 अरब डॉलर की है और निर्यात 2019-20 के लगभग 12 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 19 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा में 12,271 स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनमें 11,500 से ज्यादा को DPIIT और Startup India के तहत मान्यता प्राप्त है। सरकार की कोशिश है कि CETA से मिलने वाले अवसर केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें वास्तविक निवेश, निर्यात और रोजगार में बदला जाए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने UK और हरियाणा से जुड़ी कंपनियों के उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कृषि उत्पादों, टेलीकॉम उपकरणों और इलेक्ट्रिक वाहनों समेत आधुनिक तकनीक से जुड़े उत्पादों की जानकारी ली। इस दौरान हरियाणा में काम कर रही UK की कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रदेश में कारोबार तथा निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की।

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