दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को 7 दिनों के भीतर एक महत्वपूर्ण अपील पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। यह अपील शिर्डी के श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट (Sai Baba Trust) की ओर से दायर की गई है, जिसमें साईं बाबा और ट्रस्ट के खिलाफ कथित रूप से झूठे, मानहानिपूर्ण, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप लगाने वाले यूट्यूब वीडियो तथा अन्य ऑनलाइन कंटेंट को लेकर आपत्ति जताई गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष सावधानी बरती। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अपने आदेश में संबंधित वीडियो की सामग्री को न तो दोहराएगी और न ही उसका उल्लेख करेगी, क्योंकि ऐसा करने से समुदाय विशेष के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट ने अपनी याचिका में दावा किया है कि संबंधित वीडियो और ऑनलाइन सामग्री की निरंतर उपलब्धता साईं बाबा के करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है। ट्रस्ट का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था से जुड़े अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि वीडियो में किए गए दावे न केवल तथ्यहीन और भ्रामक हैं, बल्कि वे धार्मिक विश्वासों को चोट पहुंचाने वाले भी हैं। इसी आधार पर ट्रस्ट ने विवादित सामग्री को हटाने की मांग की है। ट्रस्ट ने अदालत से उन संचारों (कम्युनिकेशन) को भी रद्द करने की मांग की है, जिनके माध्यम से Google LLC और YouTube ने वीडियो हटाने के अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था। ट्रस्ट का आरोप है कि शिकायतों और आपत्तियों के बावजूद संबंधित प्लेटफॉर्म ने विवादित सामग्री को हटाने से इनकार कर दिया।
गूगल ने ट्रस्ट के वीडियो हटाने के अनुरोध को ठुकराया
दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश ट्रस्ट द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें 17, 18, 19, 24 और 26 जुलाई 2026 को Google LLC/YouTube की ओर से भेजे गए जवाबों को चुनौती दी गई है। इन जवाबों में गूगल ने कुछ वीडियो हटाने के ट्रस्ट के अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था। ट्रस्ट ने अदालत को बताया कि संबंधित वीडियो में श्री साईं बाबा के खिलाफ झूठे, मानहानिपूर्ण, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। साथ ही ट्रस्ट के खिलाफ भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो उसकी प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित करते हैं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को निर्देश दिया कि वह मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट की अपील पर विचार करे और सात दिनों के भीतर तर्कपूर्ण एवं कारणयुक्त आदेश जारी करे। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि समिति अपने फैसले की जानकारी ट्रस्ट को उपलब्ध कराए। इसके अलावा हाई कोर्ट ने 19 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
ट्रस्ट बोला- बार-बार बताने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिका के अनुसार, ट्रस्ट ने सबसे पहले सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत Google LLC/YouTube के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। ट्रस्ट का कहना है कि उसने कथित आपत्तिजनक कंटेंट के URL और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए, लेकिन इसके बावजूद कंपनी की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ट्रस्ट ने दावा किया कि बाद में उसने केंद्र सरकार और शिकायत अपीलीय समिति (GAC) से भी संपर्क किया, लेकिन संबंधित सामग्री अब भी यूट्यूब पर उपलब्ध है। इसी कारण उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
ट्रस्ट की मांग- वीडियो हटाएं या उन तक पहुंच रोकी जाए
ट्रस्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के माध्यम से केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार Google LLC/YouTube को निर्देश दे कि वह विवादित वीडियो को हटाए या कम से कम उन तक पहुंच को अक्षम करे। इसके साथ ही ट्रस्ट ने शिकायत निवारण प्रणाली में सुधार की मांग भी उठाई है। ट्रस्ट का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाली सामग्री से जुड़े मामलों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए जारी दिशानिर्देशों और शिकायत प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि शिकायत दर्ज करते समय अपलोड की जा सकने वाली फाइलों की संख्या और शिकायत विवरण के लिए निर्धारित कैरेक्टर सीमा जैसे प्रतिबंधों को हटाया जाए, ताकि शिकायतकर्ता अपने पक्ष और साक्ष्यों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें।
प्रतिवादियों की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ
हाई कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान अन्य प्रतिवादियों की ओर से कोई भी अधिवक्ता या प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे ने पक्ष रखा, जबकि केंद्र सरकार और अन्य सरकारी अधिकारियों की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत के समक्ष दलीलें प्रस्तुत कीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को निर्देश दिया कि वह कानूनी अपील पर 7 दिनों के भीतर तर्कपूर्ण और कारणयुक्त निर्णय दे।
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