दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। शहर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक से ज्यादा नेताओं की ‘मुस्कुराहट’ का पहरा है। चौक-चौराहे हों या मुख्य मार्ग, शायद ही कोई ऐसा खंभा या कोना बचा हो जहां किसी माननीय का चेहरा न चमक रहा हो। जन्मदिन हो, चुनाव हो या कोई धार्मिक आयोजन बड़े-बड़े होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर ऐसे तने खड़े हैं मानो शहर की असली पहचान यही हों।

मजेदार बात यह है कि इनमें से ज्यादातर ‘बिन बुलाए मेहमान’ यानी बिना अनुमति के टांगे गए अवैध होर्डिंग्स हैं। वैसे तो हाईकोर्ट और प्रशासन समय-समय पर इन अवैध बैनरों के खिलाफ सख्त ‘डंडा’ चलाता रहता है, लेकिन नर्मदापुरम में ये आदेश सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहे हैं। कार्यक्रम खत्म हुए हफ़्तों बीत जाते हैं, पर नेताओं के ये पोस्टर हटने का नाम नहीं लेते। जनता सोच रही है कि इन पर पानी की तरह बहने वाला पैसा आखिर किसके काम आ रहा है और इसकी जवाबदेही किसकी है? ​

अब सबसे बड़ा और चटपटा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कोई ‘सिंघम’ वाला एक्शन दिखाएगा या फिर मामला ‘ढाक के तीन पात’ ही रहेगा? जब इस बारे में नगरपालिका सीएमओ वैभव देशमुख से पूछा गया, तो उनका जवाब किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। साहब बोले “हाईकोर्ट के आदेश की खबर मैंने अखबार में पढ़ी तो है, लेकिन हमारे पास अभी विभाग से कोई लिखित आदेश नहीं आया है। जैसे ही कागज मिलेगा, हम तुरंत एक्शन लेंगे।” ​अब साहब को कौन समझाए कि शहर की सूरत बिगाड़ रहे इन होर्डिंग्स को देखने के लिए चश्मे की जरूरत है, किसी सरकारी चिट्ठी की नहीं! देखना दिलचस्प होगा कि नगर पालिका कब ‘अखबारी ज्ञान’ से बाहर निकलकर सड़कों पर झाड़ू चलाती है।

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