शनिवार को ईरान में एक और व्यक्ति को फांसी पर लटका दिया गया है। इस बार एर्फान कियानी नामक व्यक्ति को सजा-ए-मौत दी गई है। कियानी पर ईरानी अधिकारियों ने इजराइल के ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद से जुड़े होने और जनवरी 2026 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाया था।

ईरान ने क्या लगाए आरोप ?

ईरान की न्यायपालिका से संबद्ध समाचार एजेंसी के अनुसार, कियानी को इस्फहान में सुरक्षा बलों पर हमला करने, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, आगजनी और अशांति फैलाने का दोषी पाया गया। अदालत ने उसे “विदेशी एजेंसियों का किराए का एजेंट” बताया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा की पुष्टि होते ही उसे सुबह जल्दी से फांसी दे दी गई। यह कार्रवाई हालिया ईरान-इजरायल तनाव और उसके बाद भड़के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद दी जा रही फांसियों की श्रृंखला का हिस्सा मानी जा रही है।

बेहद ख़ुफ़िया तरीके से चलाये जाते हैं मुक़दमे

इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, खासकर इसलिए क्योंकि मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता की कमी होती है। उनका कहना है कि कई मुकदमे गुप्त रूप से चलाए जाते हैं और आरोपियों को उचित कानूनी सहायता या बचाव का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता। दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनके हस्तक्षेप के कारण ईरान में फांसी की सजा पर रोक लगी है। हालांकि, ताजा घटनाक्रम उनके इस दावे के विपरीत दिखाई देता है। तेहरान लगातार प्रदर्शनकारियों और कथित जासूसों को सख्त सजा दे रहा है।

ईरानी सरकार का कहना है कि देश में हुए विरोध प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों, विशेषकर इजरायल और पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त था। वहीं, आलोचकों का मानना है कि इन फांसियों का उद्देश्य असहमति को दबाना और डर का माहौल बनाना है।

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