Too big for one’s boots… सफलता, ज्ञान, पद, समृद्धि और शक्ति यह सभी अहंकार के प्रमुख कारक है। अहंकारी व्यक्ति का प्रभाव मंडल बाहरी रूप से भले ही बड़ा दिखाई दे मगर उसका अंतरतम खोखला होता है। इसी संदर्भ में किसी की लिखी एक सार्थक पंक्ति “अहंकार से व्यक्ति फूल सकता है, फल नहीं सकता” बहुत कारगर लगती है। सोचा जाए तो हवा से फूले हुए ग़ुब्बारे के भीतर का सार क्या है? इसीलिए अहंकारी व्यक्ति का वास्तविक विकास शून्य हो जाता है क्योंकि अहंकार सीखने की प्रक्रिया को बाधित करता है। अहंकारी व्यक्ति स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मानता है इसलिए उसे दूसरों की बात सुनाई नहीं देती।

स्वाभाविक रूप से इसका प्रभाव उनके मानसिक विकास पर पड़ता है और वह धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ने लगता है। विनम्रता व्यक्ति को निरंतर सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। समाज में सम्मान और सफलता दोनों ही प्राप्त करने के लिए व्यक्ति का विनम्र होना न्यूनतम पात्रता है।

एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक अहंकारात् विनश्यति बुद्धिः में भी यही बताया गया है कि अहंकार से बुद्धि का नाश होता है। अहम और वहम से बड़े-बड़े राजाओं और विद्वानों का पतन हुआ है जबकि विनम्रता से साधारण भी महान बने हैं। सफलता, सहजता, संयम और नम्रता को एक साथ साधने वाला व्यक्ति कभी पतित नही मिलेगा।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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