ISRO Privatization Case: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के निजीकरण पर बवाल मच गया है। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण से इसरो कर्मचारी चिंतित हैं। इसरो के प्राइवेटाइजेशन को लेकर 9 कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष आयोग अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। अंतरिक्ष विभाग के तहत हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन संघों ने अंतरिक्ष आयोग अध्यक्ष से इस मुद्दे पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। ISRO की भविष्य की भूमिका, रॉकेट/उपग्रह निर्माण में उसकी भागीदारी पर स्पष्टीकरण मांगा है। बता दें कि अंतरिक्ष आयोग अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ही इसरो अध्यक्ष भी हैं।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के सरकार के फैसले के छह साल बाद पहली बार कर्मचारियों ने मोर्चा खोला है। इसरो केंद्रों के नौ कर्मचारी संघों ने इस बदलाव की दिशा और इसके आधार को लेकर औपचारिक रूप से चिंता जाहिर की है।
4 सितंबर को ISRO के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को लिखे पत्र में इन कर्मचारी संगठनों ने मोदी सरकार की निजीकरण नीति, इसरो की भविष्य की भूमिका और सेवारत कर्मचारियों और भविष्य की भर्ती पर इसके परिणामों के बारे में स्पष्टता मांगा है। पत्र पर इसरो के कई केंद्रों के कर्मचारी संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें ISRO Staff Association, SHAR Employees Association, ISAC Employees Association, ISRO Staff Association-LPSC समेत कई केंद्रों के कर्मचारी संगठन शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ावा देने को लेकर सार्वजनिक मंचों पर कई बयान सामने आए हैं, लेकिन अंतरिक्ष विभाग की तरफ से कर्मचारियों को अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक नीति नहीं बताई गई है।
PSLV और LVM3 भी निजी क्षेत्र को देने की चर्चा
कर्मचारी संघों ने इन-स्पेस के अध्यक्ष पवन गोयनका के हालिया सार्वजनिक बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि इसरो अंततः किसी भी लॉन्च वाहन का निर्माण नहीं करेगा। संघों ने सवाल पूछा है कि क्या गोयनका का बयान भारत सरकार, अंतरिक्ष आयोग या अंतरिक्ष विभाग का स्वीकृत निर्णय है? यदि हां, तो इस नीतिगत फैसले की तारीख और आधिकारिक जानकारी साझा की जानी चाहिए। यूनियनों ने PSLV, LVM-3 और SSLV जैसे वाहनों के डिजाइन, विकास, एकीकरण, परीक्षण और लॉन्चिंग में इसरो की भविष्य की भूमिका को लेकर भी स्पष्टता मांगी है।
सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से पूछा है कि पवन कुमार गोयनका का बयान आधिकारिक सरकारी नीति को दर्शाता है या नहीं. उन्होंने यह भी सवाल किया कि भविष्य में PSLV, LVM3, SSLV और इनके नए संस्करणों के डिजाइन, विकास, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी ISRO के पास रहेगी या नहीं। संगठनों का कहना है कि इसको लेकर कर्मचारियों को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
प्राइवेटाइजेशन पर इसरो अध्यक्ष ने ये कहा
स्पेस सेक्टर इकोसिस्टम के प्राइवेटाइजेशन पर हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए, ISRO चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा, “प्लीज़ समझें, हमारे देश की स्पेस इकॉनमी को बढ़ना है और स्पेस इकोसिस्टम को भी बढ़ना है क्योंकि ISRO अकेले देश की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकता। अभी हमारे पास 56 सैटेलाइट हैं, लेकिन ज़रूरत सैकड़ों सैटेलाइट की है। इसलिए, सरकार ने स्पेस सेक्टर में सुधारों की घोषणा की है, और ISRO इन कामों को देख रहा है। हमें सच में यह पक्का करना होगा कि हमारे देश में स्पेस इकोसिस्टम बढ़े।
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