“Don’t count your chickens before they hatch…” सफलता पाने की अकूत इच्छा सभी के मन में होती है मगर अति उत्साह में सभी कुछ ग़लतियाँ कर बैठते हैं। उनमे से एक है परिणाम आने से पहले ही उसका जश्न मनाना और यह हमेशा से एक बड़ी भूल रही है। अंग्रेज़ी में इसके लिए कहते हैं “Don’t count your chickens before they hatch” इसका आशय है अधूरी संभावनाओं को वास्तविकता मान लेना मूर्खता है।
कार्य की शुरुआत में उत्साह का होना स्वाभाविक होता है। अति उमंग यदि अति-आत्मविश्वास में बदल जाए तो पतन निश्चित है। योजना बनाते ही सफलता के सपनों में खोने वाले आगे चलकर निराश होते हैं । योजना बना कर ही खुश होने वालों को यह नही भूलना चाहिए कि असली चुनौती का सामना बनाई हुई योजना को धरातल में उतारने के लिए करना पड़ता है। अधूरी सफलता पर गर्व करना हमें उसके लिए किए जाने वाले अनिवार्य प्रयास से दूर कर देता है।
महाकवि कबीर दास जी ने लिखा है “धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।” यानी हर काम समय के साथ ही पूर्ण होता है।
भारतीय दर्शन भी सिखाता है कि मनुष्य को केवल कर्म करना चाहिए उसके फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। हमारा अधिकार केवल कर्म पर है फल पर नहीं। हमें अपनी पूरी ऊर्जा और समर्पण योजना को आकार देने में लगाना चाहिए न कि कल्पनाओं में खो जाना चाहिए।
एक नीति श्लोक “कालः सर्वत्र गच्छति, न च तिष्ठति कश्चन।” में भी कहा गया है कि समय निरंतर चलता रहता है इसलिए धैर्य और सही समय का महत्व है।
धैर्य और संयम को सफलता की कुंजी इसीलिए कहते हैं क्योंकि समय से पहले उम्मीदों का महल बना लेने से अक्सर निराशा ही मिलती है। हम अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करें और जब तक वांछित परिणाम न आ जाए विनम्र बने रहें।
जीवन में संतुलन बनाए रखें, मेहनत करें और सफलता मिलने तक प्रतीक्षा करें। क्योंकि धैर्य, परिश्रम और सही समय के साथ जो प्राप्त हो वही सच्ची जीत है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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