“A good teacher can inspire hope, ignite the imagination, and instill a love of learning.” 5 सितंबर, उन महान विभूतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है जो शिक्षक बन कर ज्ञान की रोशनी से हमारे जीवन के अंधकार को दूर करते हैं. “The best teachers teach from the heart, not from the book.” इस पंक्ति का आशय है कि एक अच्छा शिक्षक किताबी ज्ञान से परे अपने विद्यार्थियों को समझ कर , उनकी प्रतिभा को पहचान कर, प्रेम, विश्वास और प्रेरणा के साथ उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाता है. 5 सितंबर 1888 को जन्मे महान दार्शनिक, शिक्षाविद् और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस राष्ट्र के सभी पात्र शिक्षकों को सम्मान देने का अवसर होता है. डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व, चरित्र और विवेक का निर्माण करना है.

गुरुओं के प्रति आभार और वंदन व्यक्त करने वाला संस्कृत का अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक – “अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया. चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥” इसका अर्थ है जिस गुरु ने ज्ञान के प्रकाश ने अज्ञानता के अंधकार में डूबी मेरी आँखें खोल दीं मै उस गुरु को बार-बार प्रणाम करता हूँ. संसार के सभी महान व्यक्तित्वों के जीवन में किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन अवश्य रहा है. योग्य शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाते वे सोचने की क्षमता, संघर्ष करने का साहस और असफलताओं से सीखने का संस्कार भी देते हैं.
अमेरिका के प्रमुख इतिहासकार, शिक्षाविद और लेखक हेनरी एडम्स का प्रसिद्ध कथन है “A teacher affects eternity; he can never tell where his influence stops.” जिसका अर्थ है शिक्षक का प्रभाव अनंत काल तक रहता है. एक शिक्षक कभी नहीं जान सकता कि उसके द्वारा दी गई शिक्षा किसी विद्यार्थी के जीवन में कितना बड़ा परिवर्तन ला रही है. एक शिक्षक का ज्ञान और संस्कार विद्यार्थियों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुँच जाता है.

संस्कृत के एक प्रसिद्ध सुभाषित “आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया.पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च॥” के अनुसार विद्यार्थी अपने ज्ञान का एक चौथाई गुरु से, एक चौथाई अपनी बुद्धि से, एक चौथाई सहपाठियों से और शेष एक चौथाई समय और अनुभव से प्राप्त करता है. दक्षिण अफ्रीका के महान क्रांतिकारी, राजनीतिज्ञ और देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने भी शिक्षा के विषय में कहा था “Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.” यानी शिक्षा वह सबसे शक्ति है जिसके माध्यम से दुनिया को बदला जा सकता है.
प्राचीन भारत में गुरु-शिष्य परंपरा में हमारे महर्षियों और आचार्यों ने ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, चरित्र और जीवन-मूल्यों की जो शिक्षा दी है इसका असर आज भी हमारे संस्कारों में दिखाई देता है. इसीलिए कहा गया है “Teachers plant the seeds of knowledge that grow forever.” अर्थात् “शिक्षक ज्ञान के ऐसे बीज बोते हैं जो सदा बढ़ते और फलते-फूलते रहते हैं. आज डिजिटल युग में जब सूचना हमारी उंगलियों पर उपलब्ध है तब शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि सूचनाएँ तो बहुत है लेकिन सही सूचना को ज्ञान में और ज्ञान को जीवन की दिशा में बदलने का विवेक शिक्षक ही दे सकता है. इस शिक्षक दिवस पर आइए अपने शिक्षक को धन्यवाद क़रें क्योंकि एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी को सफल बनाने से अधिक उसे सफलता के योग्य बनाने मे रुचि लेता है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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