Jharkhand Millet Mission: हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren government) ने झारखंड में मिलेट मिशन की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य मोटे अनाज के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करना है। राज्य में सूखे को देखते हुए झारखंड सरकार ये योजना लेकर आई है। मोटे अनाज की खेती पर सरकार ₹15000 तक प्रोत्साहन राशि दे रही है। मोटे अनाज की खेती के लिए अब तक राज्य के 24,070 किसानों ने मिलेट मिशन के तहत खेती करने के लिए अपना पंजीयन कराया है। कृषि विभाग ने पंजीकृत किसानों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए जिलों को 11.47 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है।

किसानों को जोड़ने के लिए राज्य के सभी 24 जिलों में 7 जुलाई से 22 जुलाई तक कुल 1,311 विशेष कैंप आयोजित किए गए थे। विभाग ने इस वर्ष 1,17,440 एकड़ में मिलेट की खेती का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अब तक 53,590.92 एकड़ भूमि पर बुवाई शुरू हो चुकी है।

कृषि विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार, विशेष पंजीयन अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। कृषि विभाग के मुताबिक सरकार आने वाले दिनों में रांची, देवघर और जमशेदपुर में मिलेट कैफे खोलने की योजना पर काम कर रही है।

प्रति एकड़ ₹3,000 प्रोत्साहन और 50% सब्सिडी पर बीज

मिलेट मिशन के तहत किसानों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

  •     लाभ की सीमा: यह योजना न्यूनतम 10 डिसमिल और अधिकतम 5 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले किसानों के लिए लागू होगी। यानी एक किसान को न्यूनतम ₹300 से लेकर अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
  •     सब्सिडी: इसके अलावा किसानों को मिलेट के बीज 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

रागी, ज्वार और बाजरा पर सबसे ज्यादा जोर

मिलेट के अंतर्गत मुख्य रूप से रागी (मड़ुआ), ज्वार, बाजरा और मक्का की खेती की जाती है। झारखंड में सबसे अधिक रागी की खेती होती है, जिसके बाद ज्वार और बाजरा का स्थान आता है।

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