झारसुगुड़ा। ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में फर्जी बी.एड सर्टिफिकेट के जरिए छात्रों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर पुलिस ने इस मामले में चित्तरंजन बारिक और रीमा दास को गिरफ्तार किया है, जो बुर्ला के निवासी बताए जा रहे हैं।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्रों को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले स्थित निजी कॉलेजों में बी.एड में प्रवेश दिलाने का झांसा देते थे। इसके एवज में वे प्रत्येक छात्र से 25 से 30 हजार रुपये कमीशन के रूप में लेते थे, साथ ही कोर्स फीस के नाम पर लाखों रुपये भी वसूलते थे।

फर्जी दस्तावेज देकर करते थे गुमराह

आरोपी छात्रों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी एडमिशन लेटर और ‘डिस्टेंस मोड’ के सर्टिफिकेट जारी करते थे। जबकि नियमों के अनुसार बी.एड कोर्स नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के तहत पूरी तरह नियमित (रेगुलर) होता है और इसे डिस्टेंस मोड में नहीं कराया जा सकता।

‘वन वर्ल्ड एकेडमी’ के नाम पर चल रहा था नेटवर्क

यह पूरा रैकेट ‘वन वर्ल्ड एकेडमी’ नामक संस्था के जरिए संचालित किया जा रहा था। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में आलोक कुमार पात्रा और संग्राम केसरी समेत अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है।

300 से ज्यादा छात्र ठगी के शिकार

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि झारसुगुड़ा, ब्रजराजनगर, बेलपहाड़, लईकेरा और लखनपुर क्षेत्र के 300 से अधिक छात्र इस गिरोह के झांसे में आ चुके हैं। ब्रजराजनगर के ओरिएंट थाना क्षेत्र की एक छात्रा की शिकायत के बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ।

SP के निर्देश पर गहन जांच

झारसुगुड़ा के पुलिस अधीक्षक जी.आर. राघवेंद्र के निर्देश पर साइबर पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

छात्रों और अभिभावकों के लिए चेतावनी

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बी.एड कोई डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम नहीं है। छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने या पैसे जमा करने से पहले उसकी मान्यता NCTE और संबंधित विश्वविद्यालय से जरूर जांच लें।

इस खुलासे के बाद शिक्षा व्यवस्था में फैले फर्जीवाड़े पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।