कुंदन कुमार/पटना। केंद्रीय मंत्री और हम (HAM) पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अपनी पार्टी की राज्य परिषद की बैठक में कई चौंकाने वाले और तीखे बयान दिए हैं। उन्होंने न केवल दलितों की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई बल्कि देश के राजनीतिक परिदृश्य पर भी खुलकर अपनी बात रखी।
दलितों की स्थिति और सेपरेट इलेक्टोरल की मांग
जीतन राम मांझी ने दलितों की बदहाली पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज जब दुनिया चांद पर पहुंच रही है तब भी दलित समाज पिछड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि दलितों का वास्तविक विकास तभी संभव है जब उनके लिए सेपरेट इलेक्टोरल (पृथक निर्वाचन मंडल) की व्यवस्था हो। उन्होंने संसद में दलितों के मुद्दों की अनदेखी पर अफसोस जताते हुए कहा कि सदन में केवल चंद्रशेखर रावण ही दलितों की बात उठाते हैं जिन्हें उन्होंने ही यह सीख दी है।
बेटे को नसीहत और जाति बंधन पर राय
अपनी पार्टी के भविष्य पर चर्चा करते हुए मांझी ने बेटे और मंत्री संतोष मांझी को स्पष्ट सलाह दी कि वे मुद्दे की राजनीति करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर पार्टी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगी तभी वह शीर्ष पर पहुंचेगी। इसके साथ ही उन्होंने दलितों को सुझाव दिया कि यदि जातिगत बंधन नहीं टूट रहे हैं तो उन्हें हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लेना चाहिए।
चिराग पासवान पर तंज और सम्राट चौधरी का बचाव
बिना नाम लिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर कटाक्ष करते हुए मांझी ने कहा कि कुछ लोग आरक्षण के हितैषी होने का ढोंग करते हैं और नाखून कटाकर शहीद बनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोपलगाया कि दलितों और आरक्षण के नाम पर अधिक सीटें हथिया ली गई लेकिन वास्तविक हक नहीं मिला।
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बचाव करते हुए मांझी ने कहा कि वे किसी की आंख का कांटा’ बने हुए हैं। सम्राट चौधरी की पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवालों को लेकर उन्होंने उनका पक्ष लिया। मांझी के ये बयान बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ने के लिए काफी हैं।

