कुंदन कुमार/पटना/अजय शास्त्री/ बेगूसराय। ​श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर बिहार की राजनीति में उबाल देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने इस अवसर पर न केवल मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की बल्कि विपक्ष विशेषकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जमकर निशाना साधा।

​रविशंकर प्रसाद का बंगाल और बांकीपुर पर बयान

​पटना में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रविशंकर प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने दशकों तक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व और उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को धूमिल करने की कुत्सित कोशिश की। रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि अब स्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज केंद्र में भाजपा की सरकार है और देश में राष्ट्रवाद की लहर है। पश्चिम बंगाल में मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण इसका प्रमाण है जिससे वहां की जनता में भारी उत्साह है।
​पटना की बांकीपुर सीट पर आगामी चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने पूरी तरह आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन बांकीपुर की जनता ने भाजपा पर अपना अटूट भरोसा जताया है। उन्होंने दावा किया कि वहां विपक्ष का कोई भी उम्मीदवार खड़ा हो, भाजपा की जीत सुनिश्चित और प्रमाणिक है।

​गिरिराज सिंह का तीखा प्रहार और एनकाउंटर पर चुप्पी

​वहीं अपने संसदीय क्षेत्र बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला। मुखर्जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही नेहरूवादी सोच और विपक्ष का एजेंडा हमेशा तुष्टिकरण का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष डॉ. जाकिर हुसैन या डॉ. अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्वों के नाम का इस्तेमाल केवल मदरसा या विशिष्ट संस्थानों के तुष्टिकरण के लिए करता रहा है।
​गिरिराज सिंह ने कहा कि विपक्ष की राजनीति दोहरे चरित्र पर आधारित है। वे कभी अंबेडकरवादी बनने का नाटक करते हैं, तो कभी सनातनी होने का दिखावा करते हैं लेकिन वास्तव में उनके पास अब कोई ठोस एजेंडा नहीं बचा है। जनता इनके नकाब के पीछे के असली चेहरे को पहचान चुकी है।
​हालांकि इसी कार्यक्रम के दौरान जब उनसे आरा (भोजपुरी) में हुए हालिया कथित फर्जी एनकाउंटर मामले पर सवाल पूछा गया तो वे असहज नजर आए। इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से बचते हुए उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि मामले को अभी रहने दें प्लीज। यह बयान विपक्ष को उन पर हमला करने का एक नया मौका दे गया है जबकि भाजपा नेता फिलहाल इन बयानों के जरिए अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को धार देने में जुटे हैं।