कानपुर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत शुरू होते ही अधिवक्ताओं के एक समूह ने बहिष्कार करते हुए हंगामा किया और कुछ अधिवक्ताओं से नोकझोंक हुई. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के पहुंचने के बाद स्थिति शांत हुई और करीब डेढ़ बजे वादों की सुनवाई फिर शुरू हो गई.

कानपुर. शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय लोक अदालत सुबह 10 बजे शुरू हुई, लेकिन इसके साथ ही अधिवक्ताओं के एक समूह ने इसके बहिष्कार का ऐलान करते हुए दीवानी न्यायालय परिसर में हंगामा शुरू कर दिया. करीब डेढ़ घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान कुछ अधिवक्ताओं के बीच नोकझोंक हुई और मामला हाथापाई तक पहुंचने की स्थिति बनी.

राष्ट्रीय लोक अदालत में वादकारी अपने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए पहुंचे थे. हंगामा बढ़ने पर बैंक, बीमा कंपनी और केस्को के निस्तारण कैंपों में मौजूद लोग वहां से इधर-उधर चले गए.

सम्मेलन में हुआ था ऐलान

बार और लायर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में दो दिन तक प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किया गया था. सम्मेलन के अंतिम दिन मंच से राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार की घोषणा की गई थी.

इसके बाद बार के महामंत्री बिनय मिश्रा और लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजीव यादव के नेतृत्व में करीब तीन दर्जन अधिवक्ता नारे लगाते हुए दीवानी न्यायालय परिसर पहुंचे. अधिवक्ता एकता जिंदाबाद और लोक अदालत का बहिष्कार करो जैसे नारे लगाते हुए वे परिसर में पहुंचे.

काम कर रहे अधिवक्ताओं से विवाद

परिसर में कुछ अधिवक्ता काम करते दिखाई दिए. बहिष्कार का हवाला देते हुए उनसे काम नहीं करने का अनुरोध किया गया.

इसी दौरान कुछ अधिवक्ताओं के बीच नोकझोंक हो गई. विवाद बढ़ने पर मामला हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आ गई, जिसके बाद मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराया.

हंगामा बढ़ता देख बैंक, बीमा कंपनी और केस्को के निस्तारण कैंपों में बैठे लोग वहां से हट गए. इस दौरान न्यायालय परिसर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

पुलिस आयुक्त पहुंचे

हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल पुलिस बल के साथ कचहरी पहुंचे. पुलिस बल ने परिसर के भूतल से लेकर पांचवें तल तक गश्त की, हालांकि तब तक हंगामा शांत हो चुका था.

इसके बाद पुलिस आयुक्त ने न्यायिक अधिकारियों, बार के महामंत्री और लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री के साथ वार्ता की. अधिवक्ताओं की ओर से दावा किया गया कि किसी वादकारी को परेशान नहीं किया गया और केवल अधिवक्ताओं से काम नहीं करने का अनुरोध किया गया था.

करीब डेढ़ बजे न्यायालय की व्यवस्था सामान्य हुई और इसके बाद वादों की सुनवाई दोबारा शुरू हो गई.