अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और धार्मिक वस्तुओं की चोरी के दावों के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने घोषणा की है कि वे आगामी शुक्रवार (26 जून) को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर यह जानकारी साझा की थी, जिसमें उन्होंने अयोध्या यात्रा और रामलला के दर्शन का कार्यक्रम बताया। इस बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) ने इस घोषणा पर केजरीवाल पर तंज कसा है और उनके बयान को लेकर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद वे बेहद दुखी हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि “हर सनातनी दुखी है”, और इसी कारण उन्होंने शुक्रवार को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने का निर्णय लिया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने केजरीवाल के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा। उन्होंने लिखा— “शुक्रवार को जाएंगे? जुमे की नमाज के पहले या उसके बाद?” यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
क्या है राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला?
समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहले यह दावा किया था कि मंदिर के चढ़ावे में गबन हो रहा है। उनके इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से और गरमा गया। इसके बाद भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे सियासी टकराव और बढ़ गया। विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है और कथित चंदा/चढ़ावा गबन की जांच के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जल्द ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है।
लखनऊ के एक जौहरी ने कहा है कि उन्होंने मंदिर को करीब तीन किलोग्राम वजनी चांदी का दीपक और अन्य चांदी की वस्तुएं दान की थीं, लेकिन अब उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जौहरी के अनुसार, यह चांदी की सामग्री विधिवत पूजा के बाद मंदिर ट्रस्ट कार्यालय को सौंपी गई थी और उसकी रसीद भी दी गई थी। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि तीन किलो चांदी के दान की अलग से कोई रसीद उन्हें नहीं मिली, जिससे वे असमंजस में हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि भूमिपूजन या स्थापना प्रक्रिया के दौरान यह सामग्री अपेक्षित रूप से स्थापित नहीं की गई होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि संभव है कि यह मामला प्रोटोकॉल या प्रक्रिया संबंधी कारणों से जुड़ा हो।
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