Dharm Desk – हिंदू धर्म में तुलसी और शिवलिंग दोनों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. लेकिन इन दोनों की पूजा से जुड़े कुछ ऐसे धार्मिक नियम हैं. जिनकी जानकारी बहुत कम लोगों को होती है, विशेष रूप से सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में शिवलिंग पूजन से जुड़े नियमों का पालन करना और भी जरूरी है. शास्त्रों के अनुसार, जहां एक ओर तुलसी को देवी का रूप माना गया है. शिवलिंग भगवान शिव का साक्षात प्रतीक है. लेकिन इन दोनों को एक साथ स्थापित करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं है.

तुलसी के साथ शिवलिंग क्यों नहीं रखा जाता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी का संबंध भगवान विष्णु और उनके शालिग्राम स्वरूप से होता है. यही कारण है कि तुलसी के साथ केवल शालिग्राम का ही पूजन किया जाता है. कई लोग अज्ञानता में तुलसी के पास शिवलिंग स्थापित कर देते हैं, जिसे शास्त्रों में वर्जित बताया गया है. ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और धार्मिक दोष भी लग सकता है.
शिवलिंग के स्थान का रखें विशेष ध्यान
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग को कभी भी बंद स्थान या कमरे के भीतर स्थापित नहीं करना चाहिए. भगवान शिव को खुले स्थान प्रिय माने जाते हैं. इसलिए उनका स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां खुलापन और शुद्ध वातावरण हो. यदि घर में मंदिर है, तो वहां शिवलिंग रखने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
दिशा का भी होता है खास महत्व
शिवलिंग की वेदी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि उत्तर दिशा को शिव की दिशा माना जाता है. इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.
शिवलिंग का आकार कैसा होना चाहिए
घर में स्थापित किया जाने वाला शिवलिंग बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए. सामान्यतः 6 इंच तक का शिवलिंग ही उपयुक्त माना गया है. बड़े शिवलिंग की पूजा के लिए विशेष नियम और व्यवस्थाएं होती हैं. जिन्हें सामान्य गृहस्थ के लिए निभाना कठिन हो सकता है. सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र अर्पित करने का महत्व होता है. इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा भगवान शिव को प्रसन्न करती है, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है. इसलिए यदि आप भी अपने घर में शिवलिंग स्थापित करने की सोच रहे हैं. इन धार्मिक नियमों का पालन अवश्य करें, ताकि आपकी पूजा सफल हो सके.

