इमरान खान, खंडवा। मध्य प्रदेश में नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने की तैयारी पर सियासी और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर मुस्लिम समाज के कई संगठनों ने कड़ा विरोध जताते हुए अदालत जाने की बात कही है। इस कड़ी में खंडवा के शहर काजी का भी बयान सामने आया है। आइए जानते है उन्होंने क्या कुछ कहां है…

खंडवा शहर काजी सैयद निसार अली ने कहा कि, सन्नवर पटेल को फिर से अध्यक्ष बनाया गया, मतलब उन्होंने अच्छा काम किया होगा, लेकिन जो दो गैर मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति है, उस पर सवाल हैं और हम इसका विरोध करते हैं। वक्फ की जो संपत्ति है, वह हमारे बुजुर्गों की ओर से वक्फ (दान) दी गई है। सबसे बड़ी बात ये है कि मजहबी मामला है और हम नहीं चाहते कि हमारे मजहबी मामले में कोई गैर मजहबी व्यक्ति इसमें शामिल हो, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं।

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शहर काजी ने आगे कहा कि हम मध्य प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि आप इस पर फिर से विचार करें, फिर से देखें। वक्फ बोर्ड और मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का मामला 2025 सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए हम मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करते हैं, मांग करते हैं कि इस पर फिर देखें। उन्होंने यह भी कहा कि आम तौर पर यह देखा भी जा रहा कि, मुसलमान के मजहबी मामले पर सरकारें इंटरफेयर कर रही हैं। हम चाहते हैं कि आजादी के साथ संविधान के दायरे में देश में रहने की आजादी दी, वह आजादी जारी रहे। इंटरनल मामलों में सरकारें दखल अंदाजी ना करें।

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