किशनगंज। जिले से शिक्षा जगत को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के एक प्रमुख शिक्षण संस्थान केसी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पर नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली करने का आरोप लगा है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ उठाने के लिए फर्जी छात्रों के नाम का सहारा लिए जाने की पुष्टि होने के बाद संस्थान के खिलाफ टाउन थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
भौतिक सत्यापन में खुला फर्जीवाड़े का राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक निदेशक ने पूरे मामले की गहन जांच करवाई। मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच प्रक्रिया के दौरान कुल 12 संदिग्ध संस्थानों को रडार पर लिया गया था, जिनमें से 10 संस्थानों में छात्र वास्तविक पाए गए। वहीं, एक अन्य संस्थान में पाई गई अनियमितताओं के बाद संबंधित राशि की रिकवरी कर ली गई। लेकिन, जब जांच की सुई ‘केसी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी’ पर रुकी, तो संस्थान के काले कारनामे उजागर हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, इस संस्थान में 85 ऐसे छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड दर्ज मिला, जिनका कोई वजूद ही नहीं था।
कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम?
शिकायत के अनुसार संस्थान के संस्थागत नोडल अधिकारी (INO) और संस्थान प्रमुख (HOI) ने मिलीभगत कर एनएसपी पोर्टल पर गलत और भ्रामक जानकारी अपलोड की। सरकारी खजाने को चूना लगाने की मंशा से अयोग्य और फर्जी छात्रों के नाम पर स्कॉलरशिप की राशि स्वीकृत कराई गई। यह सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन का मामला है, जिसमें संस्थान के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।
कानूनी कार्रवाई और रिकवरी का दबाव
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत, किसी भी संस्थान द्वारा छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। टाउन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर संबंधित आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। इसके अलावा, नियमों के अनुसार, संस्थान को उन सभी फर्जी छात्रों के नाम पर ली गई राशि का शत-प्रतिशत हर्जाना और ब्याज सहित भुगतान करना होगा। यह घटना जिले के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता के साथ समझौता करने पर कड़ी कानूनी गाज गिरेगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।

